न्याय के नाम पर नौटंकी ! भूविस्थापितों की अर्धनग्न चीखें भी SECL को नहीं जगा पाईं

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अर्धनग्न प्रदर्शन से भी नहीं टूटा SECL का दिल! आम आदमी पार्टी ने उठाई भूविस्थापितों की आवाज

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर/कोरबा | “जहां पेट की आग में इज्जत की चादर जल रही हो, वहां SECL की चुप्पी सबसे बड़ा अपराध है” – इसी तेवर और तल्ख लहजे में आम आदमी पार्टी (छत्तीसगढ़) ने आज भूविस्थापितों के अपमान और अधिकारों के हनन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

कोरबा की कुसमुंडा परियोजना में विस्थापित परिवारों को लेकर SECL की नीति और नीयत पर सवाल खड़े करते हुए AAP की प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गा झा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की। उन्होंने कहा कि, आज़ादी के 75 साल बाद भी यदि महिलाओं को अर्धनग्न प्रदर्शन करना पड़े, तो यह केवल प्रशासन की असफलता नहीं, बल्कि उसकी संवेदनहीनता का घिनौना चेहरा है। दुर्गा झा ने आरोप लगाया कि कुसमुंडा परियोजना में फर्जी नौकरियां बांटी गईं और वास्तविक भूविस्थापितों को वर्षों से नौकरी से वंचित रखा गया। महिलाओं ने GM ऑफिस के भीतर अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया, और अधिकारियों को चूड़ियाँ भेंट करते हुए कहा, आप पहन लीजिए चूड़ियाँ, हम लौट जाते हैं। अब आप ही हमारी लड़ाई लड़िए।

SECL की नीतियों पर उठे गंभीर सवाल

महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश बघेल और उपाध्यक्ष प्रियंका शुक्ला ने प्रबंधन की कथनी-करनी पर दोहरी नीति का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रबंधन पुराने रिकॉर्ड और नाम मात्र की सहमति दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। सवाल यह है कि अगर फर्जी नियुक्तियां हुईं, तो फिर जिम्मेदार कौन?”

1978 की नीति और वर्तमान अन्याय

AAP ने बताया कि 1978 में जब यह परियोजना प्रारंभ हुई थी, उस समय तीन एकड़ जमीन के बदले एक नौकरी देने का नियम तय था। लेकिन उसके बाद बड़े पैमाने पर राजस्व कर्मियों और SECL अधिकारियों की मिलीभगत से जमीनों के टुकड़े करवा कर फर्जी नामों पर नौकरी बांटी गई। प्रदेश सह-सचिव अनुषा जोसेफ़ ने बताया कि, बहुत से असली जमीन मालिक आज तक बेरोजगार बैठे हैं, जबकि नौकरी किसी और के हिस्से चली गई। यह सुनियोजित घोटाला था, और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”

प्रभावितों के हक की लड़ाई जारी रहेगी

कोरबा लोकसभा अध्यक्ष प्रतिमा सिन्हा ने कहा कि पुनर्वास, मुआवज़ा, रोजगार जैसे मूल अधिकार आज भी अधूरे हैं। आम आदमी पार्टी मांग करती है कि, सभी पात्र भूविस्थापितों को तत्काल नौकरी दी जाए। फर्जी नियुक्तियों की जांच हो। अधिकारी और कर्मचारी, जिन्होंने हेराफेरी की, उन पर कार्रवाई हो।

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