नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने आज एक उच्च-स्तरीय कॉन्फ्रेंस में वन विभाग के कार्यों और वनांचलों में आजीविका के साधनों की विस्तार से समीक्षा की। कलेक्टरों और वनमण्डलाधिकारियों (DFO) की उपस्थिति में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के भुगतान में तेजी लाने, लघु वनोपजों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने और वन-धन केंद्रों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। इस दौरान वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही श्रीनिवास राव सहित कई उच्च अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वनों से जुड़ी आजीविका, विशेषकर तेंदूपत्ता संग्रहण, राज्य की अर्थव्यवस्था और जनजातीय कल्याण का आधार है। उन्होंने निर्देश दिया कि तेंदूपत्ता संग्राहकों को उनका भुगतान 7 से 15 दिनों के भीतर हर हाल में किया जाना सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही, यह जानकारी संग्राहक के मोबाइल पर SMS के माध्यम से भी भेजी जाए। यह निर्णय पारदर्शिता और संग्राहकों के सीधे सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए योजना बनाई जाये। धमतरी, मुंगेली, जीपीएम जिले में औषधीय पौधों की खेती पर सभी उपस्थित डीएफओ को जानकारी दी गई। औषधीय पौधों की खेती से परम्परागत उपचार का ज्ञान भी आगे बढ़ेगा। औषधीय पादप बोर्ड के सीईओ ने इस क्षेत्र में संभावनाओं और लोगो के आजीविका को बढ़ाने के बारे में विस्तृत जानकारी दी औषधीय पौधों की खेती के विस्तार के लिए प्रचार प्रसार गतिविधियां बढ़ाई जाये कृषि, उद्यानिकी विभाग के मैदानी अमले की सहायता ले

प्रमुख निर्देश और चर्चा के बिंदु :
- तेंदूपत्ता भुगतान में क्रांति:
- भुगतान की अवधि को 7 से 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश।
- सभी भुगतान बैंक खातों के माध्यम से ही किए जाएं।
- संग्रहकों को भुगतान की स्थिति की जानकारी SMS के जरिए मोबाइल पर भेजी जाए।
- लगभग 15 लाख 60 हजार संग्राहकों की जानकारी ऑनलाइन की गई है।
- आने वाले सीजन के लिए बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर जैसे जिलों में विशेष कार्य योजना बनाने को कहा गया है, जहाँ पिछले सीजन में संग्रहण हुआ था।
- तेंदूपत्ता संग्रहण की पूरी प्रक्रिया को कंप्यूटरीकृत करने की पहल करने का निर्देश दिया गया है।
- लघु वनोपज और आजीविका विकास:
- मुख्यमंत्री ने कहा कि लघु वनोपज को वनांचलों में आजीविका का महत्वपूर्ण साधन बनाया जाए।
- वन धन केंद्रों को और अधिक मजबूत कर उन्हें आय का स्थायी स्रोत बनाने का निर्देश।
- लघु वनोपज आधारित स्टार्टअप्स को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जाए।
- उत्पादों का प्रमोशन और प्रमाणीकरण:
- ‘छत्तीसगढ़ हर्बल’ और ‘संजीवनी’ के उत्पादों को ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर प्रमोट करने पर जोर दिया गया ताकि इनका मार्केट विकसित हो सके।
- इन उत्पादों का जैविक प्रमाणीकरण (Organic Certification) तेजी से पूरा किया जाए ताकि इन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार मिल सके।
मुख्यमंत्री की इस उच्चस्तरीय बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार वनांचल के लोगों की आय बढ़ाने और वन संसाधनों के प्रबंधन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर गंभीरता से काम कर रही है।




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