
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान के बीच, रायपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष पद की दावेदार प्रीति उपाध्याय शुक्ला की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भूचाल ला दिया है। यह पोस्ट महज एक व्यक्तिगत दावेदारी नहीं, बल्कि कांग्रेस की ‘आधी आबादी’ की दबी-कुचली पीड़ा और ‘नारी न्याय’ की तीखी पुकार है। प्रीति ने सीधे तौर पर पार्टी के उन ‘पुराने मठाधीशों’ पर तंज कसा है, जिन पर ‘सेटिंग’ कर अपने चहेतों को थोपने का आरोप लगता रहा है। उनकी यह भावनात्मक लेकिन बेहद मुखर पोस्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व—विशेषकर राहुल गांधी—के लिए एक सीधा संदेश और पारदर्शिता का इम्तिहान बन गई है: क्या इस बार ‘आधी आबादी’ को उनका ‘आधा हक’ मिलेगा, या फिर वही पुरानी कहानी दोहराई जाएगी?
राहुल गांधी पर ‘उम्मीदों का बोझ’: कार्यकर्ता की अग्निपरीक्षा
प्रीति उपाध्याय शुक्ला ने अपनी पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति का अंतिम फैसला AICC महासचिव वेणुगोपाल की रिपोर्ट के आधार पर राहुल गांधी ही लेंगे। उन्होंने लिखा, “हम जैसी महिलाएं राहुल गांधी जी की तरफ उम्मीद से देख रही हैं।” राहुल गांधी ने संगठन सृजन अभियान को “पार्टी की नींव मजबूत करने” और समर्पित कार्यकर्ताओं को नेतृत्व सौंपने का माध्यम बताया था। प्रीति की यह उम्मीदें इसलिए बोझिल हैं क्योंकि यह सवाल खड़ा होता है कि क्या ज़मीनी वादे केवल कागजों तक ही सीमित रहेंगे?

तीखा तंज : “या कि वही मठाधीश अपने लोगों को सेट कर देंगे?”
पोस्ट का सबसे विस्फोटक हिस्सा उन ‘मठाधीशों’ पर किया गया कटाक्ष है, जो दशकों से पदों पर कब्जा जमाए बैठे हैं और नए, समर्पित चेहरों को आगे नहीं आने देते। प्रीति ने आशंका जताई है कि वही पुराने ठेकेदार फिर से अपनी ‘सेटिंग’ से परिणाम बदल देंगे। उनका यह तंज स्पष्ट आंतरिक कलह और निराशा को दर्शाता है। उन्होंने साफ चेतावनी दी: “यदि ऐसा हुआ तो आगामी चुनाव में परिणाम भी वही होगा जो होता आ रहा है।” यह साफ इशारा है कि महिलाओं और युवाओं को मौका न मिलने पर कांग्रेस को चुनावी हार (यानी हार की हैट्रिक) का सामना करना पड़ सकता है।
महिलाओं की पुकार : ‘आधी आबादी को आधा हक’
प्रीति की पोस्ट का केंद्रीय विषय ‘नारी न्याय’ और ‘आधी आबादी को आधा हक’ है। उन्होंने सीधा सवाल दागा है कि क्या वर्षों से जमीनी स्तर पर काम कर रही महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिलेगा? यह केवल रायपुर शहर अध्यक्ष पद की बात नहीं है, बल्कि उस राष्ट्रीय वादे की याद दिलाना है जहां कांग्रेस महिलाओं को 50% आरक्षण देने की बात करती है। प्रीति का यह बयान छत्तीसगढ़ की उन हज़ारों महिला कार्यकर्ताओं की आवाज़ है, जो महसूस करती हैं कि उनकी मेहनत को नेतृत्व की सीढ़ियों पर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
पारदर्शिता का इम्तिहान
यह पूरा घटनाक्रम छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए एक निर्णायक मोड़ है। प्रीति की पोस्ट ने संगठन सृजन अभियान की पारदर्शिता को सीधे चुनौती दी है। अब सभी की निगाहें राहुल गांधी पर टिकी हैं कि क्या वह इस ‘नारी न्याय’ की पुकार को सुनकर समर्पित और नए नेतृत्व को मौका देंगे, या फिर ‘पुराने मठाधीशों’ की ‘सेटिंग’ को हावी होने देंगे।





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