भाजपा नेताओं के लिए काम करने वाले बताए जा रहे आरोपियों पर FIR के बाद भी कार्रवाई नहीं, पीड़ित पर ‘राजीनामा’ का दबाव !

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। राजधानी रायपुर में अवैध जुआ और सट्टा चलाने वाले माफिया के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका प्रमाण रामसागरपारा में हुई एक सनसनीखेज घटना और उसके बाद पुलिसिया कार्रवाई में हो रही देरी से मिलता है। सट्टा माफिया से जुड़े दो लड़कों पर दिनदहाड़े मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगा है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला तथ्य यह है कि आज़ाद चौक थाना में रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद, आरोपियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि पीड़ित पर राजीनामा (समझौता) करने का दबाव बनाने की बात सामने आई है। राजधानी की सड़कों पर अगर अवैध वसूली और जानलेवा हमला करने वाले अपराधी आज़ाद घूम रहे हैं और पुलिस केवल ‘लिखा-पढ़ी’ तक सीमित है, तो यह कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। मामला जुआ और सट्टे के कारोबार से जुड़ा है, जहां नितेश सिन्हा उर्फ शिबू और दादू 79 नामक दो लड़के कथित तौर पर बड़े सट्टा कारोबारियों—रानू दुबे, विशाल खंडेलवाल और रोहित बजाज—के लिए सट्टा और क्रिकेट सट्टे की दलाली का काम करते हैं। इन दोनों लड़कों ने 31 अक्टूबर को सुबह 11 बजे रामसागरपारा में एक व्यक्ति से सट्टे के पैसे को लेकर अवैध वसूली की कोशिश की और मारपीट की। सत्ताधारी दल का नाम सामने आने और पुलिसिया inaction (अकर्मण्यता) के कारण आम जनता में आक्रोश है और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
दिनदहाड़े मारपीट और जान से मारने की धमकी
पीड़ित आवेदक के अनुसार, 31 अक्टूबर को सुबह 11 बजे नितेश सिन्हा और दादू 79 रामसागरपारा पहुंचे।
- अवैध वसूली: दोनों युवकों ने सट्टे के पैसे के नाम पर अवैध वसूली की मांग की।
- हमला: पैसा नहीं देने पर आरोपियों ने आवेदक के साथ जमकर मारपीट की।
- गंभीर धमकी: मारपीट के दौरान, आरोपियों ने पीड़ित को जान से मारने की धमकी भी दी।
पुलिस पर गंभीर आरोप: FIR के बाद भी चुप्पी
आवेदक ने तत्काल आज़ाद चौक थाना पहुंचकर पूरी घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन, रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद अभी तक आरोपियों पर कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई है।
- राजनीतिक संरक्षण के आरोप: शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि आरोपी कथित तौर पर कुछ बड़े नामों (रानू दुबे, विशाल खंडेलवाल, रोहित बजाज) के लिए काम करते हैं और उनके राजनीतिक संरक्षण के चलते पुलिस कार्रवाई से बच रही है।
- राजीनामा का दबाव: आवेदक का यह भी आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर केवल ‘लिखा-पढ़ी’ चल रही है और उस पर राजीनामा (समझौता) करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
आम जनता का आक्रोश:
इस घटना और पुलिस की ढिलाई ने आम जनता में असंतोष पैदा कर दिया है। चाय दुकान और पान दुकान चलाने वाले साधारण नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि अगर राजधानी में ही अवैध कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा का क्या होगा। यह स्थिति भाजपा शासन में अपराधियों के हौसले बुलंद होने की ओर इशारा करती है।




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