
जिला बनने के बाद भी नवोदय विद्यालय से वंचित है मनेन्द्रगढ़
मनेन्द्रगढ़। कोरिया जिले से अलग जन होकर स्वतंत्र जिला मुख्यालय बनने के बाद मनेन्द्रगढ़वासियों ने अनेक आशाएं सं जो ई थीं। शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उम्मीद थी कि जवाहर नवोदय विद्यालय की – स्थापना, जिससे जिले के होनहार विद्यार्थियों को गुणवत्तायुक्त और निःशुल्क आवासीय शिक्षा मिल सके, लेकिन यह सपना आज भी अधूरा है। जिले में नवोदय विद्यालय खोलने की मांग कई बार उठाई गई, परंतु यह मुद्दा आज भी ठंडे बस्ते में पड़ा है। आश्चर्यजनक रूप से स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा इस विषय पर कोई ठोस पहल या सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।जिला बनने के बाद आम जनता ने सोचा था कि उनके बच्चों को अब अपने ही जिले में उच्च गुणवत्ता वाला विद्यालय मिलेगा, जहां प्रतिभावान, आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण छात्र भी आगे बढ़सकेंगे, लेकिन वर्षों बाद भी न तो भूमि चयन की प्रक्रिया शुरू हुई, न ही कोई प्रस्ताव शासन स्तर तक भेजा गया। जहां कोरिया, सरगुजा, बलरामपुर जैसे जिलों में नवोदय विद्यालय वर्षों से संचालित हो रहे हैं और विद्यार्थियों को इसका भरपूर लाभ मिल रहा है, वहीं मनेन्द्रगढ़ जैसे नवगठित जिले को इस सुविधा से वंचित रखना शैक्षणिक असमानता को दर्शाता है।


अब जनता कर रही है सवाल
जनता का कहना है कि अगर सरकार और जनप्रतिनिधि चाहें तो नवोदय विद्यालय की स्थापना कोई मुश्किल कार्य नहीं है। बस जरूरत है इच्छाशक्ति और प्रशासनिक सक्रियता की। यदि शीघ्र पहल नहीं की गई, तो आने वाली पीढ़यिों को एक और शैक्षणिक अवसर से वंचित रहना पड़ेगा।
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