

मनेन्द्रगढ़। प्रभु श्रीराम के कदम छत्तीसगढ़ में मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले के रास्ते पड़े थे। श्रीराम को 25 साल की उम्र में 14 वर्ष का वनवास हुआ था। वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने अपने 10 साल छत्तीसगढ़ में बिताए थे। इस जगह को वनवास के दौरान श्रीराम के छत्तीसगढ़ प्रवेश के रूप में माना जाता है। जब से सीतामढ़ी हरचौका के लोगों को यह जानकारी हुई कि अयोध्या में श्रीराम लला का मंदिर निर्माण का भूमिपूजन हो रहा है, तब से यहां हवन पूजन और राम नाम की गूंज सुनाई पड़ रही है।
माता सीता ने पकाया था भोजन


सीतामढ़ी हरचीका में भगवान श्रीराम ने रात्रि विश्राम किया था। तो इस मंदिर में सीता माता की रसोई भी देखने को मिलाती है। लोग यहां आज भी सीता की रसोई देखने पहुंचते है। यहीं पर माता चैत्र राम नवमी और नवरात्रि के समय यहां पर भव्य मेले का आयोजन भी किया जाता है। छतीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश और सीमावती राज्यों के श्रद्धालु यहां पर पहुंचते हैं और पूजा अर्थना कर सकते सांगते है।
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