‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और OBC आरक्षण पर आर-पार की जंग, छत्तीसगढ़ से पहुंचे 1000 से अधिक महिला कांग्रेसी
नई पहल न्यूज नेटवर्क। नई दिल्ली/रायपुर। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ का स्वाभिमान और शक्ति-प्रदर्शन सिर चढ़कर बोला। छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं विधायक संगीता सिन्हा ने अपने आक्रामक तेवरों और ओजस्वी भाषण से पूरे अधिवेशन में जान फूंक दी। उन्होंने केंद्र सरकार को घेरते हुए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ को बिना किसी शर्त तुरंत लागू करने और इसमें ओबीसी वर्ग की महिलाओं को आरक्षण देने की जोरदार वकालत की।
संगीता सिन्हा का छत्तीसगढ़ी अंदाज़: गूंजे ये नारे
मंच संभाले ही विधायक संगीता सिन्हा ने अपनी माटी की बोली में दिल्ली के दिल को छू लिया। उन्होंने देश भर से आईं हज़ारों महिला कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करते हुए छत्तीसगढ़ी लहजे में गगनभेदी नारे लगवाए, जिससे पूरा पांडाल गूंज उठा:
- “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया… महिला आरक्षण लागू करहु, आज करहु, अभी करहु!”
- “अधिकार हमर कोई भीक नहीं… नारी शक्ति वंदन नियम ला लागू करहु, आज करहु, अभी करहु!”
अधिवेशन के दौरान मीडिया एवं मंच से अपना पक्ष रखते हुए छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने सीधा हमला बोला:
“नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सिर्फ चुनावी झुनझुना बनाकर सालों-साल के लिए टालना देश की आधी आबादी के साथ सीधा छलावा है। मोदी सरकार अगर सच में महिलाओं का सम्मान करती है, तो इसे ‘आज और अभी’ लागू करे। हमारी मांग एकदम स्पष्ट है—इस कानून में पिछड़ा वर्ग (OBC) की बहनों को उनका वाजिब हक और पृथक आरक्षण मिलना ही चाहिए। जब तक हमारी यह मांग पूरी नहीं होती और इसे धरातल पर नहीं उतारा जाता, छत्तीसगढ़ की नारियाँ दिल्ली के इस मंच से लेकर गलियों तक संघर्ष जारी रखेंगी।”
सामाजिक न्याय और राजनीतिक भागीदारी पर जोर
संगीता सिन्हा ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं को समान भागीदारी मिलना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार है। जब तक समाज के हर वर्ग, विशेषकर पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिलेगा, तब तक सामाजिक न्याय का लक्ष्य अधूरा ही रहेगा।
छत्तीसगढ़ से उमड़ा हज़ारों कार्यकर्ताओं का सैलाब
प्रदेश अध्यक्ष संगीता सिन्हा के आह्वान पर छत्तीसगढ़ के हर कोने से 1,000 से अधिक महिला पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का जत्था राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुँचा था। छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान, पारंपरिक ऊर्जा और अधिकारों की लड़ाई का जज्बा लेकर पहुँचे इस प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की संगठनात्मक ताकत का लोहा मनवा दिया।
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