बोर्ड परीक्षा में 33वें नंबर पर रहा जिला, नई कलेक्टर की पहली समीक्षा बैठक को ‘इवेंट’ बनाने में जुटे जिला शिक्षा अधिकारी, क्या हकीकत छिपाने की हो रही कोशिश ?
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में शिक्षा व्यवस्था आईसीयू में नजर आ रही है। हाल ही में आए बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों ने जिले की साख पर बट्टा लगा दिया है। प्रदेश के 33 जिलों में MCB जिला सबसे आखिरी पायदान पर रहा है। इस शर्मनाक प्रदर्शन के बाद जहाँ एक ओर जिला प्रशासन में हड़कंप है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग के आला अधिकारी इस गंभीर मुद्दे को ‘उत्सव’ में बदलने की तैयारी कर रहे हैं।
कलेक्टर सख्त, विभाग मस्त: समीक्षा है या स्वागत समारोह?
जिले की कमान संभालते ही नवपदस्थ कलेक्टर संतन देवी जांगड़े ने शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता पर लेते हुए कल, 15 मई को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सभी DEO, BEO, ABEO और प्राचार्यों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई है। उम्मीद थी कि इस बैठक में विफलता के कारणों पर मंथन होगा, लेकिन सूत्रों की मानें तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इसे एक ‘भव्य मंच’ की तरह सजाना शुरू कर दिया है। बैठक के एजेंडे को ‘सम्मान कार्यशाला’ का रूप दिया जा रहा है, जैसे कोई बड़ा उत्सव होने जा रहा हो।
अधिकारियों की ‘पीएचडी’: गुमराह करने का नया खेल!
MCB जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारी अपने ‘कारनामों’ के लिए सुर्खियों में रहते हैं। आरोप है कि विभाग में नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को उपकृत किया जा रहा है।
- बिना सेटअप नियुक्तियाँ: बिना किसी मापदंड के चहेते शिक्षकों को APC, DPO और ADPO जैसे पदों पर बैठा दिया गया है।
- प्रोटोकॉल की अनदेखी: मनेंद्रगढ़ में कार्यरत एक सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) पर आरोप हैं कि वे वरिष्ठ अधिकारियों के प्रोटोकॉल को दरकिनार कर स्कूलों में ‘मनोरंजन’ करते फिर रहे हैं।
- चहेतों की ड्यूटी: कल होने वाली बैठक के लिए भी उन्हीं शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है, जिन्हें DEO कार्यालय में बिना किसी ठोस नियम के ‘अटैच’ (संलग्न) करके रखा गया है।
सम्मान की आड़ में नाकामी छिपाने की रणनीति ?
चर्चा है कि जिले के खराब प्रदर्शन पर कलेक्टर के गुस्से से बचने के लिए विभाग ने ‘सम्मान कार्ड’ खेला है। उन प्राचार्यों का सम्मान करने की योजना बनाई गई है जिनका प्रदर्शन 100% रहा, ताकि पूरी बैठक का फोकस जिले की ओवरऑल विफलता (33वां स्थान) से हटकर चुनिंदा उपलब्धियों पर टिक जाए। क्या यह नई कलेक्टर को गुमराह करने की एक सोची-समझी साजिश है?
क्या बालोद जैसा ‘एक्शन’ लेने से हिचक रहा विभाग ?
हाल ही में बालोद जिले में खराब नतीजों पर कलेक्टर द्वारा प्राचार्यों के निलंबन और वेतन वृद्धि रोकने जैसी सख्त कार्रवाई की गई थी, जिसका शिक्षक संगठनों ने विरोध किया था। माना जा रहा है कि MCB जिले के अधिकारी इसी ‘खौफ’ का फायदा उठाकर बैठक को केवल ‘प्रेरणा और मार्गदर्शन’ तक सीमित रखना चाहते हैं, ताकि किसी पर कार्रवाई की गाज न गिरे।
बड़ा सवाल: क्या नवपदस्थ कलेक्टर संतन देवी जांगड़े शिक्षा विभाग के इन ‘मायावी’ आंकड़ों और स्वागत सत्कार के पीछे छिपी कड़वी सच्चाई को देख पाएंगी? क्या उन अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय होगी जिनकी वजह से जिला प्रदेश में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है?
कल की बैठक के बाद यह साफ हो जाएगा कि MCB की शिक्षा व्यवस्था में वास्तव में सुधार होगा या ‘चहेतों’ और ‘इवेंट मैनेजमेंट’ का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।
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