अरण्य की तरह चार खंडों में विकसित हुई है ‘यक्षिणी’ की अनूठी कथा; माँ नर्मदा, अमरकंटक, चांगभखार और कोरिया क्षेत्र के पौराणिक वैभव का जीवंत सफर !

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नई पहल न्यूज नेटवर्क। कोरिया। क्या कोई किताब सिर्फ पन्नों का पुलिंदा होती है, या फिर किसी दूसरी ही दुनिया में प्रवेश करने का एक जादुई दरवाज़ा? सुप्रसिद्ध लेखक और अफसर आशुतोष चतुर्वेदी की नई अनूठी कृति ‘यक्षिणी: मैकल की अनुगूँज’ इस परिभाषा को पूरी तरह बदल देने के लिए आ चुकी है। साल २०२१ में शुरू हुई यह लेखन यात्रा लगभग ५ वर्षों की अनवरत साहित्यिक साधना के बाद अब पूरी होकर पाठकों के सामने है। यह केवल पढ़ी जाने वाली कथा नहीं है, बल्कि आशुतोष चतुर्वेदी की कलम से निकला एक ऐसा सम्मोहन है जो आपके भीतर धीरे-धीरे उतरता है।

​यह एक शुद्ध पौराणिक पृष्ठभूमि पर आधारित महाकाव्यात्मक उपन्यास है, जो पाठक को सीधे उस प्राचीन काल में ले जाता है जब देश की धड़कनें आधुनिक शोर में नहीं, बल्कि बैलगाड़ियों की खनक और घोड़ों की टापों के सफर में बसती थीं।

प्रकृति की तरह विकसित होती कथा: चार अनूठे खंड

​इस उपन्यास की बनावट इतनी अद्भुत है कि इसका विकास ठीक वैसे ही होता है जैसे कोई अरण्य (जंगल) धीरे-धीरे अपने वैभव को पाता है। आशुतोष चतुर्वेदी ने इस महाकाव्यात्मक यात्रा को चार खूबसूरत खंडों में पिरोया है:

  1. ​बीज: जहाँ रहस्य और कथा की नींव पड़ती है।
  2. ​अंकुरण: जहाँ से भावनाएँ और घटनाएँ आकार लेना शुरू करती हैं।
  3. ​अनुगूँज: जहाँ मैकल के जंगलों की पुकार पाठक के अंतर्मन तक गूँजती है।
  4. ​अंतर्ध्वनि: जहाँ पहुँचकर यह कथा एक गहरी और कभी न भूलने वाली रूहानी आवाज़ बन जाती है।

छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के अंचल का अनूठा समागम

​आशुतोष चतुर्वेदी ने इस उपन्यास में हमारे अपने कछार और अरण्य संस्कृति को बेहद गहराई से पिरोया है। पूरी कथा में आपको इन पावन और ऐतिहासिक क्षेत्रों की गूँज सुनाई देगी:

  • ​माँ नर्मदा और अमरकंटक का पावन और अलौकिक साम्राज्य।
  • ​मैकल पर्वत श्रेणी और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के रहस्यमयी घने जंगल।
  • ​ऐतिहासिक नगरी रतनपुर और बिलासपुर का वैभव।
  • ​चांगभखार, कोरिया क्षेत्र और बैकुंठपुर की अनछूई प्राचीन छटा।
  • ​रामगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहाड़ियाँ।

क्यों खास है आशुतोष चतुर्वेदी की ‘यक्षिणी ‘?

इस उपन्यास की सबसे बड़ी यूएसप इसका रोंगटे खड़े कर देने वाला वातावरण है। यहाँ जंगल की खामोशी में एक रहस्यमयी कंपन है। जैसे-जैसे आप पन्ने पलटते हैं, समय की रफ्तार धीमी होने लगती है और आप खुद को एक ऐसे भूले-बिसरे युग में पाते हैं जहाँ:

  • ​जीवित वन: पेड़-पौधे और हवाएँ बातें करती महसूस होती हैं।
  • ​जागती प्रतिज्ञाएँ: सदियों पुराने वादे और नियति की आहट हर पन्ने पर आपका पीछा करती है।
  • ​अदृश्य रहस्य: हर परछाईं के पीछे समय से भी पुराना कोई राज़ साँस लेता है।

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