बड़ी जिम्मेदारी : केंद्र सरकार ने सौंपा वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के CMD का अतिरिक्त प्रभार, कल से संभालेंगे मोर्चा
नई पहल न्यूज नेटवर्क। बिलासपुर/नागपुर। भारतीय कोयला उद्योग के कुशल रणनीतिकार और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन के कंधों पर भारत सरकार ने एक और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। कोयला मंत्रालय के ताज़ा आदेश के अनुसार, श्री दुहन अब वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के सीएमडी का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। यह आदेश 01 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा।
जहाँ से शुरू हुआ सफर, वहीं अब ‘सर्वोच्च’ कमान
हरीश दुहन के लिए यह प्रभार बेहद खास है। उन्होंने वर्ष 1989 में इसी कंपनी (WCL) से एक युवा माइनिंग इंजीनियर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। आज अपने 34 वर्षों के व्यापक अनुभव और तकनीकी दक्षता के दम पर वे उसी कंपनी के शीर्ष पद की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं।

SECL में रचा इतिहास: आधुनिक खनन के बने प्रणेता
मार्च 2025 में SECL की कमान संभालने के बाद श्री दुहन ने कंपनी की कार्यशैली में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं:
- देश में प्रथम: उनके नेतृत्व में SECL भूमिगत खदानों में ‘पेस्ट-फिल तकनीक’ अपनाने वाली देश की पहली कोल पीएसयू बनी।
- लैंड पजेशन का रिकॉर्ड: लंबे समय से लंबित भू-अधिग्रहण के मुद्दों को सुलझाते हुए उन्होंने रिकॉर्ड 250 हेक्टेयर से अधिक भूमि का पजेशन प्राप्त किया।
- नारी शक्ति को सलाम: कोल इंडिया की पहली पूर्णतः महिला-संचालित डिस्पेंसरी और ऑल-वूमेन सेंट्रल स्टोर यूनिट शुरू कर उन्होंने कॉर्पोरेट जगत में समावेशन की नई मिसाल पेश की।
तकनीकी कौशल और विजनरी नेतृत्व
नागपुर विश्वविद्यालय से माइनिंग इंजीनियरिंग में स्नातक श्री दुहन के पास फर्स्ट क्लास माइन मैनेजर सर्टिफिकेट और प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा है। वे पूर्व में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) में निदेशक (तकनीकी) और नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। सौर ऊर्जा, डिजिटलीकरण और ‘फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी’ परियोजनाओं में उनकी विशेषज्ञता के कारण उन्हें भविष्य-उन्मुख नेतृत्व माना जाता है।
तीन माह का होगा प्रारंभिक कार्यकाल
मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह अतिरिक्त प्रभार प्रारंभिक रूप से तीन माह के लिए अथवा अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। श्री दुहन के इस दोहरे उत्तरदायित्व से छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र दोनों ही राज्यों के कोयला उत्पादन और प्रेषण में नई गति आने की उम्मीद है।
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