लोकतंत्र शर्मसार ! मुख्यमंत्री के जनचौपाल में विपक्षी विधायक को एंट्री से रोका, कलेक्टर-एसपी के फोन ने खड़े किए गंभीर सवाल

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विधायक शेषराज हरवंश का जिला प्रशासन और सरकार पर तीखा हमला, पूछा- क्या विपक्ष के जनप्रतिनिधि सिर्फ अपमानित होने के लिए हैं ?

नई पहल न्यूज नेटवर्क। पामगढ़। छत्तीसगढ़ के पामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोसला में आज उस वक्त राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के ‘जनचौपाल’ कार्यक्रम में स्थानीय विपक्षी विधायक को शामिल होने से रोकने का एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाला मामला सामने आया। विधायक ने जिला प्रशासन की इस कार्यप्रणाली को सीधे तौर पर लोकतंत्र का अपमान और दमनकारी नीति करार दिया है।

कलेक्टर-एसपी के फोन से मचा हड़कंप, कहा- ‘आपका रहना सही नहीं’

पामगढ़ विधायक ने बेहद आहत और आक्रोशित होकर बताया कि वह जनता की समस्याओं को लेकर अपने क्षेत्र के ग्राम कोसला में आयोजित मुख्यमंत्री के जनचौपाल कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं। लेकिन मुख्यमंत्री के आगमन के ठीक पहले जिले के कलेक्टर और एसपी का उनके पास फोन आता है।

अधिकारियों ने फोन पर कहा: “यह मुख्यमंत्री जी का गोपनीय कार्यक्रम है, आपका यहाँ होना सही नहीं है। आपके रहने से हमारे लिए समस्या खड़ी हो जाएगी।”

​विधायक ने सवाल उठाया कि अगर यह कार्यक्रम इतना ही “गोपनीय” था, तो वहाँ सत्ता पक्ष के तमाम छोटे-बड़े जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी पहले से कैसे मौजूद थे? क्या मुख्यमंत्री का सरकारी कार्यक्रम अब भाजपा का निजी दलगत आयोजन बन चुका है?

विधायक के तीखे सवाल: कौन देगा इसका जवाब ?

​इस दुर्व्यवहार से आहत जनप्रतिनिधि ने सीधे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कई गंभीर सवाल दागे हैं:

  • सवाल 1: मेरे साथ यह दुर्व्यवहार माननीय मुख्यमंत्री जी के आदेश पर हुआ है या जिला प्रशासन ने अपनी मर्जी से चाटुकारिता में यह कृत्य किया है?
  • सवाल 2: क्या जनचौपाल में केवल सत्ताधारी पार्टी के पदाधिकारियों को ही बैठने का अधिकार है? आम जनता और विपक्ष की आवाज का वहाँ कोई वजूद नहीं?
  • सवाल 3: क्या छत्तीसगढ़ में विपक्ष के चुने हुए विधायकों को सिर्फ अपमानित करने की नई परंपरा शुरू की जा रही है?

“विपक्ष से डरती है सरकार, लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत”

​एक चुने हुए जनप्रतिनिधि के साथ जिला प्रशासन के इस बर्ताव को बेहद शर्मनाक बताते हुए विधायक ने कहा कि यह घटना साफ तौर पर दर्शाती है कि साय सरकार विपक्षी विधायकों का सामना करने से डर रही है। जनता द्वारा चुनी गई एक महिला विधायक को इस तरह रोकना पामगढ़ की पूरी जनता का अपमान है।

बड़ा सवाल ?

नौकरशाही का ऐसा रवैया लोकतंत्र के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने वाला है। अब देखना यह होगा कि इस खुले अपमान पर माननीय मुख्यमंत्री जी जिला प्रशासन पर क्या कार्रवाई करते हैं या फिर इस “शर्मनाक कृत्य” पर मौन साधकर अपनी मौन सहमति देते हैं।

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