3.68 फिटमेंट फैक्टर और 1000 दिन की चाइल्ड केयर लीव जैसी ऐतिहासिक मांगों के साथ फेडरेशन ने सौंपा व्यापक ज्ञापन
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर|छत्तीसगढ़ के लाखों कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनभोगियों के भविष्य को लेकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने एक बड़ी और निर्णायक पहल की है। फेडरेशन ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष प्रदेश के शासकीय सेवकों की आर्थिक उन्नति और सेवा शर्तों में सुधार के लिए एक ‘एक्सक्लूसिव’ और विस्तृत मांग-पत्र प्रस्तुत किया है। इसमें न केवल वेतन वृद्धि, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और कार्य-जीवन संतुलन पर भी विशेष जोर दिया गया है।
प्रमुख आर्थिक मांगें: वेतन और भत्तों में भारी उछाल का प्रस्ताव
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने बताया कि कर्मचारियों के जीवन स्तर को सम्मानजनक बनाने के लिए वेतन संरचना में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है।
- न्यूनतम वेतन की मांग: फेडरेशन ने न्यूनतम वेतन को ₹30,000 से ₹32,500 के बीच निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया है।
- फिटमेंट फैक्टर और इंक्रीमेंट: फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.68 करने और वार्षिक वेतनवृद्धि को 3% से बढ़ाकर 5% करने की मांग की गई है।
- समयमान वेतनमान: कर्मचारियों के करियर ग्राफ को देखते हुए 8-16-24-32 वर्ष की सेवा अवधि पर समयमान वेतनमान देने का सुझाव दिया गया है।
- HRA में बदलाव: रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई जैसे शहरों को ‘X’ श्रेणी में शामिल कर 40% तक गृह भाड़ा भत्ता देने की वकालत की गई है।
सामाजिक सुरक्षा और चिकित्सा पर फोकस
कर्मचारियों की सेहत और उनके परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए फेडरेशन ने कड़े सुझाव दिए हैं:
- कैशलेस इलाज: प्रदेश में पूर्णतः कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू हो और मेडिकल अलाउंस ₹3000 प्रतिमाह किया जाए।
- शिक्षा और जोखिम भत्ता: बच्चों की पढ़ाई के लिए ₹4500 प्रति माह शिक्षा भत्ता और जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में कार्य करने वालों को 20% विशेष भत्ता।
- पुरानी पेंशन : पेंशनर्स के लिए पुरानी पेंशन योजना की पूर्ण बहाली और ग्रेच्युटी सीमा को ₹30 लाख तक बढ़ाने की मांग की गई है।
वर्किंग कल्चर में बड़े सुधार की मांग: 5-डे वीक और लीव बेनेफिट्स
फेडरेशन ने आधुनिक कार्यप्रणाली को अपनाते हुए कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलावों का भी सुझाव दिया है:
- 5 दिवसीय कार्य सप्ताह: सभी विभागों में कार्य कुशलता बढ़ाने हेतु सप्ताह में 5 दिन काम का नियम लागू हो।
- महिला सशक्तिकरण: महिला कर्मचारियों के लिए ‘चाइल्ड केयर लीव’ को बढ़ाकर 1000 दिन करने और कार्यालयों में क्रेच सुविधा का प्रस्ताव।
- संविदा नियमितीकरण: लंबे समय से संघर्षरत संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग।
हमने आठवें वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारियों की हर जायज मांग को तार्किक रूप से रखा है। हमें उम्मीद है कि आयोग इन सुझावों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा, जिससे छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक तंत्र में ऊर्जा और दक्षता का नया संचार होगा।
— कमल वर्मा, संयोजक, छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन
तात्कालिक राहत की मांग: खबर के अंत में फेडरेशन ने राज्य सरकार से केंद्र के समान लंबित 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता एरियर सहित तत्काल स्वीकृत करने की पुरजोर मांग की है, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों को राहत मिल सके।
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