नई पहल न्यूज नेटवर्क। वाराणसी। ‘विकलांग’ को ‘दिव्यांग’ शब्द देकर समाज का नज़रिया बदलने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दर पर अब वाराणसी (चेतगंज) की एक मासूम की संवेदनशील और भावुक गुहार पहुँची है। छात्रा हिरल श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र भेजकर देश भर की महिलाओं के सम्मान में एक ऐतिहासिक बदलाव की माँग की है—चिकित्सा क्षेत्र में सदियों से इस्तेमाल हो रहे ‘स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ’ शब्द से ‘रोग’ को हटाकर इसे ‘स्त्री एवं प्रसूति स्वास्थ्य विशेषज्ञ’ किया जाए।
“गर्भावस्था बीमारी नहीं, स्वास्थ्य देखभाल है”
हिरल का मानना है कि महिला के जीवन के इस सबसे पवित्र और सुंदर पड़ाव (गर्भावस्था और प्रसव) के साथ ‘रोग’ शब्द का जुड़ना उनके आत्मसम्मान पर एक अनचाहे दाग की तरह है। हिरल का स्पष्ट कहना है:

- सकारात्मक दृष्टिकोण: गर्भावस्था या मातृत्व कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह जीवन का सृजन और स्वास्थ्य की देखभाल है।
- सम्मानजनक पहचान: ‘रोग’ की जगह ‘स्वास्थ्य’ शब्द जोड़ने से चिकित्सा जगत और समाज, दोनों में महिलाओं के प्रति सोच और अधिक सकारात्मक व आदरपूर्ण बनेगी।
“मोदी अंकल सब सुनते हैं… वे हमारे सुपर हीरो हैं”
हिरल की माँ, गरिमा श्रीवास्तव ने बताया कि यह विचार पूरी तरह से हिरल का अपना था। वह काफी समय से इस बात को लेकर भावुक थी और उसने ज़िद करके यह पत्र लिखवाया।
“मेरी बेटी ने मुझसे बहुत मासूमियत और विश्वास से कहा कि ‘मोदी अंकल तो सब सुनते हैं! उन्होंने दिव्यांगजनों को इतना बड़ा सम्मान दिया, तो वह स्त्रियों के लिए भी यह बदलाव ज़रूर करेंगे।’ वह प्रधानमंत्री को अपना ‘सुपर हीरो अंकल’ मानती है।”
— गरिमा श्रीवास्तव (हिरल की माँ)
भाषा से सम्मान की एक अनूठी और मिसाल कायम करती पहल
जिस प्रकार प्रधानमंत्री मोदी ने ‘दिव्यांग’ शब्द देकर देश के लाखों लोगों को एक नई पहचान और स्वाभिमान दिया था, ठीक उसी तर्ज़ पर वाराणसी की इस बेटी की यह पहल भाषा के ज़रिए नारी सम्मान को एक नए शिखर पर ले जाने की दिशा में बेहद प्रभावी कदम मानी जा रही है।
अब देखना यह होगा कि वाराणसी की इस नन्हीं सोच का असर दिल्ली तक कितना गहरा रंग लाता है और क्या देश की करोड़ों महिलाओं को जल्द ही यह ऐतिहासिक और गरिमापूर्ण बदलाव देखने को मिलता है।
About The Author










































