बजट शून्य फिर भी स्वागत शाही; फूलों की महक मंत्रियों के गले में, और उधारी का गमला उद्यानिकी विभाग के सिर!
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। मंच पर जब ‘नेता जी’ हाथ जोड़कर किलो-दो किलो की भारी-भरकम पुष्पमाला पहनते हैं, तो तालियों की गड़गड़ाहट से पंडाल गूंज उठता है। लेकिन इस शाही मुस्कान और चमचमाती फोटो के पीछे का कड़वा सच यह है कि नेता जी का यह भव्य स्वागत किसी सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि बेचारगी में दिए गए ‘उधार’ के भरोसे हो रहा है! सरकार ने माननीयों के सत्कार का बजट तो खत्म कर दिया, लेकिन हुक्म वही पुराना है—”स्वागत में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।” नतीजे में उद्यानिकी विभाग सवा करोड़ रुपये के कर्ज में डूब चुका है, और फूल बेचने वाले छोटे दुकानदार रोज़ अफसरों को फोन लगाकर अपना बकाया मांग रहे हैं।
उधारी की माला, सत्कार का टशन
- साहिब की मुस्कान, माली का दर्द: मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और प्रभारी मंत्रियों के दौरों में मंच सजाने से लेकर हाथ में बुके थमाने तक का सारा इंतजाम उधारी पर टिका है।
- बजट गायब, पर फरमान जारी: पहले सत्कार और सजावट के लिए हर साल 1 करोड़ रुपये का बजट मिलता था। इस बार बजट में एक रुपया भी नहीं रखा गया, लेकिन वीआईपी आयोजनों के निर्देश लगातार जारी हैं।
- 15-20 शाही जलसे, बिल पेंडिंग: 15 अगस्त, 26 जनवरी, राज्योत्सव और माननीयों के दौरों को मिलाकर सालभर में 15 से 20 बड़े कार्यक्रम होते हैं। अधिकारी आदेश टाल नहीं सकते, इसलिए दुकानदारों से उधार में सामान उठाना मजबूरी बन गया है।
हर जिले में चढ़ा 5 लाख का ‘स्वागत कर्ज’
- दुकानदारों का छूटा पसीना: प्रदेश के लगभग हर जिले में 5 से 6 लाख रुपये की मालाएं, बुके और गमले उधार लिए जा चुके हैं।
- सवा करोड़ का फंसा भुगतान: पूरे राज्य में यह उधारी सवा करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुकी है।
- तगादे से परेशान अफसर: अब स्थानीय फूल विक्रेता और डेकोरेटर्स पाई-पाई के लिए रोज विभागीय अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं और फोन घुमा रहे हैं।
‘कुर्सी का हुक्म है, इंतजाम तो करना पड़ेगा!‘
शासन पहले आयोजनों के लिए बजट देता था, लेकिन इस बार बजट में प्रावधान नहीं किया गया। वीआईपी कार्यक्रमों के निर्देश मिलने पर व्यवस्था रोकना मुमकिन नहीं होता। इसी कारण प्रदेशभर में करीब सवा करोड़ रुपये का भुगतान अटक गया है। बजट जारी करने के लिए शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है।
— लोकेश चंद्राकर, निदेशक, उद्यानिकी विभाग
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