पंडित सुंदर लाल शर्मा विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य समापन, डॉ. वर्णिका शर्मा ने दिया ‘Know More to Grow More’ का मंत्र
नई पहल न्यूज नेटवर्क। बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के गांधी पंडित सुंदर लाल शर्मा जी की 145वीं जयंती एवं कुल उत्सव के पावन अवसर पर पंडित सुंदर लाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय और जनजातीय शोध एवं अनुशीलन केंद्र, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। “भारतीय जनजातियाँ: सांस्कृतिक विरासत एवं महानायकों की भूमिका” विषय पर केंद्रित इस आयोजन के समापन सत्र में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।

जनजातीय संस्कृति: भारत की अटूट नींव
अपने संबोधन में डॉ. वर्णिका शर्मा ने अत्यंत गहरा और वैचारिक वक्तव्य देते हुए कहा कि जनजातीय संस्कृति ही भारत की असली आत्मा है। उन्होंने आगाह करते हुए कहा, “किसी भी राष्ट्र को कमजोर करने के लिए सबसे पहले उसकी संस्कृति पर प्रहार किया जाता है, लेकिन हमारी जनजातियाँ उस विरासत की सबसे मजबूत नींव हैं। इन्हें सहेजना हम सभी का साझा उत्तरदायित्व है।”

‘Know More to Grow More’— विकास के लिए समझ जरूरी
डॉ. शर्मा ने विकास की नई परिभाषा गढ़ते हुए नारा दिया— “Know More to Grow More”। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक हम किसी समाज की मूल तासीर और प्रवृत्तियों को नहीं समझेंगे, तब तक हम उनके विकास के सही मार्ग (चीर) को भी नहीं पहचान पाएंगे।
- सशक्त पहचान: उन्होंने हल्बा जनजाति का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ हल चलाने तक सीमित समझना गलत है, वे ऐतिहासिक रूप से एक पराक्रमी सैनिक समुदाय रहे हैं।
- सहभागिता का संदेश: उन्होंने जोर दिया कि जनजातियों को केवल अनुकरण करने वाला समाज न समझा जाए, बल्कि उनके साथ ‘एंगेज’ और ‘इन्वॉल्व’ होकर काम करने की आवश्यकता है।
- विशाल सहभागिता: 11 तकनीकी सत्रों में 13 से अधिक विशेषज्ञों ने विचार रखे और 700 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया।
- सांस्कृतिक वैभव: जनजातीय महानायकों की गाथाओं के साथ-साथ पारंपरिक लोक नृत्य, गीतों और वेशभूषा की भव्य प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही।
- दिग्गजों की उपस्थिति: कार्यक्रम में कुलपति प्रो. बी. के. सारस्वत, प्रो. हीरालाल शर्मा, समाजसेवी वैभव सुरंगे, राजीव शर्मा, भोज विवि के प्रो. मिलिंद दांडेकर और डॉ. बीना सिंह सहित गहिरागुरु विवि के कुलसचिव त्रिपाठी जी व अन्य प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।
About The Author














