सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य का ‘सुपर इंस्पेक्शन’, लापरवाही पर शिक्षकों को नोटिस, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने के सख्त निर्देश
नई पहल न्यूज नेटवर्क। नारायणपुर। अबूझमाड़ के घने जंगलों और चुनौतीपूर्ण रास्तों को पार कर जिले की कलेक्टर नम्रता जैन बुधवार को जिले के अंतिम गांव सितरम पहुंचीं। प्रशासनिक अमले के साथ किए गए इस सघन दौरे का उद्देश्य सुदूर वनांचल में बुनियादी सुविधाओं, सड़क निर्माण और सरकारी सेवाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना था। कलेक्टर ने सोनपुर से सितरम तक करीब 70 किलोमीटर लंबे निर्माणाधीन मार्ग का निरीक्षण कर विकास की गति को तेज करने के निर्देश दिए।
सड़क निर्माण: सुगम पहुंच ही विकास की पहली सीढ़ी
कलेक्टर नम्रता जैन ने सोनपुर से जिले के अंतिम गांव सितरम तक निर्माणाधीन मार्ग का बारीकी से अवलोकन किया। इस दौरान पीडब्ल्यूडी के सब-इंजीनियर को सख्त लहजे में निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
- उद्देश्य: यह मार्ग ग्रामीणों के आवागमन, बच्चों की स्कूल पहुंच और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जीवन रेखा साबित होगा।
- निर्देश: कार्यों को समय सीमा के भीतर और मानकों के अनुरूप पूरा करने के आदेश दिए।
शिक्षा पर कड़ा रुख: अनुपस्थित शिक्षकों को नोटिस
शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर कलेक्टर बेहद गंभीर नजर आईं। उन्होंने गारपा, पांगुड़, कोंगे और सितरम के विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और बालक आश्रमों का औचक निरीक्षण किया।
- एक्शन: निरीक्षण के दौरान जो शिक्षक ड्यूटी से नदारद मिले, उन्हें तत्काल ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने के निर्देश दिए गए।
- संवाद: कलेक्टर ने बच्चों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई के स्तर को जांचा और छात्रावासों में रहने-खाने की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।
स्वास्थ्य और पोषण: महिलाओं और बच्चों से जाना हाल
स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के लिए कलेक्टर पांगुड़ के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं। उन्होंने वहां दवाओं की उपलब्धता और कर्मचारियों की उपस्थिति पंजी की जांच की। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित उपस्थिति अनिवार्य है। साथ ही ग्रामीण महिलाओं और बच्चों से सीधे संवाद कर स्वास्थ्य सुविधाओं का जमीनी फीडबैक लिया।
प्रशासनिक संदेश: कोई भी गांव विकास से दूर नहीं
कलेक्टर नम्रता जैन का यह दौरा अबूझमाड़ के उन क्षेत्रों में प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है, जो लंबे समय तक पहुंच विहीन माने जाते रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता अंतिम व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है।
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