‘मिशन रक्षक’ से बदल रही बस्तर के युवाओं की तकदीर, वर्दी पहनने का सपना हो रहा सच
नई पहल न्यूज नेटवर्क। कांकेर । छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर अंचल से एक बदलाव की महागाथा सामने आ रही है। जो आमाबेड़ा का मैदान कभी नक्सलियों का खौफनाक ‘ट्रेनिंग ग्राउंड’ हुआ करता था, वही मैदान आज ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के देशभक्ति के नारों से गुंजायमान है। इस ऐतिहासिक और दूरदर्शी बदलाव के सूत्रधार हैं कांकेर के पुलिस अधीक्षक (SP) निखिल राखेचा (IPS), जिनकी संवेदनशील सोच और प्रशासनिक पहल से शुरू हुआ ‘मिशन रक्षक’ स्थानीय युवाओं के भविष्य की नई दिशा तय कर रहा है।
कांकेर पुलिस का यह अभियान दूरदराज और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को पुलिस, सीआरपीएफ (CRPF), बीएसएफ (BSF), सीआईएसएफ (CISF) और अग्निवीर जैसी सुरक्षा बल भर्ती परीक्षाओं की मुफ्त और स्तरीय तैयारी करा रहा है।

SP निखिल राखेचा का विजन: “बंदूकों का खौफ खत्म, अब युवाओं के हाथ में होगी देश सेवा की कमान”

कांकेर पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा के अनुसार, जिले का एक बड़ा क्षेत्र लंबे समय तक नक्सलवाद की छाया में रहा, जिससे वहां रोजगार के अवसर बेहद सीमित हो गए थे। नक्सलियों के फरमानों और खौफ के कारण बेटियां और युवा घरों में कैद रहने को मजबूर थे; यहां तक कि पढ़ाई पूरी करने के बाद भी रोजगार का कोई साधन उपलब्ध नहीं था।
“हमारा उद्देश्य नक्सल प्रभावित और दूरदराज के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए मानसिक व शारीरिक रूप से तैयार करना है। ‘मिशन रक्षक’ केवल एक ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं, बल्कि युवाओं के आत्म-विश्वास और सपनों को पंख देने का माध्यम है।”
— निखिल राखेचा (SP, कांकेर)
5 केंद्रों पर मुफ़्त ट्रेनिंग: फिजिकल फिटनेस से लेकर लाइब्रेरी तक सब कुछ
एसपी निखिल राखेचा के मार्गदर्शन में यह अभियान जिले के 5 प्रमुख केंद्रों—आमाबेड़ा, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कोयलीबेड़ा और पखांजूर में चलाया जा रहा है:
- तड़के 5:30 बजे से पसीना बहा रहे युवा: सुबह 5:30 बजे से मैदानों में वार्मअप, 100 और 1500 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, गोला फेंक और क्रॉलिंग जैसी कठिन फिजिकल ट्रेनिंग दी जाती है।
- विशेषज्ञ ट्रेनरों का मार्गदर्शन: पुलिस और सुरक्षा बलों के विशेषज्ञ ट्रेनर युवाओं की रनिंग टेक्निक और शारीरिक क्षमता में सुधार ला रहे हैं।
- लिखित परीक्षा के लिए ‘मावा मोडोल’ लाइब्रेरी: शारीरिक दक्षता के साथ-साथ लिखित परीक्षा की तैयारी के लिए ‘मावा मोडोल’ (स्थानीय गोंडी बोली में अर्थ: हमारा लक्ष्य) नाम से गाइडेंस सेंटर व लाइब्रेरी स्थापित की गई है, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें मुफ़्त उपलब्ध हैं।
बेटियों का बढ़ा आत्म-विश्वास: लाल आतंक के गढ़ में अब बेटियां बनेंगी रक्षक
’मिशन रक्षक’ का सबसे सुखद पहलू यह है कि इसमें युवतियों की भागीदारी अभूतपूर्व देखने को मिल रही है। सिर्फ आमाबेड़ा केंद्र में ही 350 से अधिक युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें 60 से अधिक युवतियां शामिल हैं। जो बेटियां कभी खौफ के साये में घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, वे अब सुबह-सवेरे खाकी वर्दी पहनने का जज्बा लेकर मैदान में कड़ी मेहनत कर रही हैं।
बदलाव का नया सवेरा
कांकेर पुलिस की यह अनूठी पहल न केवल बस्तर में शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही है, बल्कि भटके हुए या असहाय युवाओं को देश रक्षा के गौरवशाली पथ पर आगे बढ़ा रही है। एसपी निखिल राखेचा की यह पहल आज पूरे छत्तीसगढ़ में पुलिसिंग और सामाजिक सरोकार की एक मिसाल बन चुकी है।
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