‘रोशनी की है सख्त जरूरत, प्रभावित हो रही पढ़ाई’— छात्राओं ने खुलकर जताई मांगें; बिजली संकट, स्मार्ट क्लास और सेनेटरी पैड डिस्पोजर पर मिला ठोस आश्वासन
नई पहल न्यूज नेटवर्क। कांकेर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कांकेर प्रवास के दौरान प्रयास कन्या छात्रावास एवं आदिवासी आवासीय विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने केवल व्यवस्थाओं का जायजा ही नहीं लिया, बल्कि छात्राओं के बीच बैठकर एक माँ की तरह उनके मन की बात सुनी। आत्मीय और मातृत्वपूर्ण माहौल में छात्राओं ने भी बिना किसी झिझक के अपनी दैनिक समस्याओं, पढ़ाई की चुनौतियों और अपनी भविष्य की आकांक्षाओं को आयोग अध्यक्ष के समक्ष साझा किया।
बिजली कटौती से पढ़ाई प्रभावित, छात्राओं ने मांगी सोलर पैनल और स्मार्ट क्लास की सुविधा

संवाद के दौरान छात्राओं ने अपनी दैनिक जीवन और शिक्षा से जुड़ी मुख्य समस्याओं को उजागर किया:

- बिजली संकट का समाधान: छात्राओं ने बताया कि बार-बार बिजली जाने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। इसके स्थायी समाधान के लिए उन्होंने छात्रावास में सोलर पैनल और आपातकालीन (इमरजेंसी) लाइटों की व्यवस्था करने की मांग की।
- डिजिटल शिक्षा और स्वच्छता: वेंडिंग मशीन होने के बावजूद सेनेटरी पैड डिस्पोजल मशीन न होने की बात सामने आई। साथ ही आधुनिक शिक्षा के लिए छात्राओं ने कंप्यूटर और स्मार्ट क्लास हेतु स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
- विशेष इच्छाएं: छात्राओं ने ‘सूर्यकिरण’ में रहने की व्यवस्था और प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिलने की उत्सुकता जताई।
“सुरक्षित और सुविधायुक्त माहौल देना हमारी जिम्मेदारी”—डॉ. वर्णिका शर्मा
छात्राओं की मांगों को बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता से सुनते हुए डॉ. वर्णिका शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया।
“बच्चों को केवल शिक्षा देना ही काफी नहीं है; उन्हें एक सुरक्षित, स्वच्छ, सम्मानजनक और सुविधायुक्त वातावरण देना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। बच्चों की छोटी से छोटी आवश्यकताओं को समय पर पूरा करना ही उनके बेहतर भविष्य की नींव रखता है।”
— डॉ. वर्णिका शर्मा, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग
अनुशासित जीवन और स्वच्छता की सराहना

निरीक्षण के दौरान आयोग अध्यक्ष ने छात्रावास के स्वच्छ माहौल, बच्चों के अनुशासित जीवन और व्यवस्थित दिनचर्या की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि बच्चों के बीच जाकर सीधे उनसे बात करने से ही बाल अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। डॉ. शर्मा के सहज और स्नेहपूर्ण व्यवहार से छात्राएं काफी उत्साहित नजर आईं।
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