विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर डॉ. वर्णिका शर्मा का कड़ा एक्शन, उरला की ‘मारुति नंदन स्ट्रक्चर’ से छुड़ाए गए 9 बच्चे; ओडिशा, यूपी और बंगाल से जुड़े हैं तार
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में आज ‘विश्व बाल श्रम निषेध दिवस’ के मौके पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एक ऐसी बड़ी और खौफनाक हकीकत का पर्दाफाश किया है, जिसने व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। मासूम हाथों को कलम की जगह लोहे की भट्ठियों में झोंकने वाले सौदागरों के खिलाफ आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में अब तक की सबसे बड़ी और संयुक्त छापामार कार्रवाई की गई है। राजधानी के उरला औद्योगिक क्षेत्र से लेकर बिलासपुर और रायपुर रेलवे स्टेशनों तक फैले इस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में कुल 20 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया गया है।
इस पूरी कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाला खुलासा अंतरराज्यीय बाल तस्करी को लेकर हुआ है, जिसकी जांच अब बेहद गंभीर और बड़े स्तर पर शुरू कर दी गई है।

दहकती लोहा फैक्ट्री में हो रहा था मासूमों का शोषण
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा को मिले गुप्त इनपुट के बाद उरला स्थित ‘मारुति नंदन स्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज’ में अचानक दी गई दबिश ने फैक्ट्री प्रबंधन के होश उड़ा दिए।
- जोखिमपूर्ण कार्य: निरीक्षण के दौरान पाया गया कि बेहद खतरनाक और भारी लोहे की इस फैक्ट्री में 9 नाबालिग बच्चों से जानलेवा और गंभीर प्रकृति का काम कराया जा रहा था।
- तत्काल एक्शन: आयोग ने मौके से ही सभी 9 बच्चों को अपनी सुरक्षा में लिया और बिना वक्त गंवाए उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया।
स्टेशनों पर भी चला सर्च ऑपरेशन, कुल 20 बच्चे रेस्क्यू

सिर्फ फैक्ट्री ही नहीं, बल्कि बच्चों की आवाजाही और उनके इन-रूट रेस्क्यू के लिए रेलवे को भी अलर्ट किया गया था:
- रायपुर उरला फैक्ट्री: 09 बच्चे मुक्त
- बिलासपुर (RPF के माध्यम से): 07 बच्चे रेस्क्यू
- रायपुर (GRP के माध्यम से): 04 बच्चे रेस्क्यू
बिहार का ठेकेदार, ओडिशा-बंगाल के बच्चे: बाल तस्करी का बड़ा नेक्सस !
शुरुआती पूछताछ में जो सच सामने आया है, उसने अधिकारियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। मुक्त कराए गए बच्चे छत्तीसगढ़ के नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों के हैं:
कहाँ के हैं बच्चे? रेस्क्यू किए गए मासूम ओडिशा, उत्तर प्रदेश के बरेली और पश्चिम बंगाल के आसनसोल के रहने वाले हैं।
मास्टरमाइंड कौन? बच्चों ने बताया कि उन्हें बिहार का रहने वाला एक ठेकेदार बहला-फुसलाकर और पैसों का लालच देकर रायपुर लाया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब पुलिस और प्रशासन इस पूरे रैकेट को खंगालने में जुट गया है कि आखिर इन बच्चों को किस तरह और कितने बड़े पैमाने पर छत्तीसगढ़ में खपाया जा रहा था।

कठोर कानूनी धाराओं के तहत केस दर्ज
बच्चों के साथ क्रूरता, अमानवीय व्यवहार और अवैध रूप से जोखिमपूर्ण काम कराने के जुर्म में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। संबंधित आरोपियों और ठेकेदार के खिलाफ किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की निम्नलिखित धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है:
- धारा 75: (बच्चों के प्रति क्रूरता)
- धारा 79: (बालक का शोषण/बंधुआ मजदूरी)
- धारा 143: (वैधानिक उल्लंघन व तस्करी से जुड़े पहलू)
“दोषियों को कड़ा सबक सिखाएंगे, हर बच्चे को मिलेगा सुरक्षित बचपन”
बाल श्रम मासूमों के अधिकारों पर सबसे बड़ा कुठाराघात है, खासकर तब जब उन्हें भारी और जोखिमपूर्ण उद्योगों के दलदल में धकेल दिया जाए। हर बच्चे का हक है कि उसे सुरक्षित बचपन, बेहतरीन शिक्षा और सम्मान मिले। आयोग बाल श्रम और बाल तस्करी की इस कुप्रथा को जड़ से उखाड़ने के लिए पूरी संवेदनशीलता से प्रतिबद्ध है। दोषियों पर ऐसी सख्त कार्रवाई होगी जो नजीर बनेगी।
— डॉ. वर्णिका शर्मा, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग
टीम में ये रहे शामिल
इस ऐतिहासिक और बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने में जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय निराला, विपिन ठाकुर, श्रम विभाग की विशेष विंग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम की बेहद सराहनीय भूमिका रही। फिलहाल सभी बच्चों को सुरक्षित ठिकानों पर रखकर उन्हें काउंसलिंग, चिकित्सकीय सहायता और पुनर्वास (Rehabilitation) की प्रक्रियाओं से जोड़ा जा रहा है, साथ ही उनके परिजनों से भी संपर्क साधा जा रहा है।
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