जनदर्शन में पहुंचे भरतपुर के दूरस्थ गांव के बुजुर्ग को मिला संबल, कलेक्टर बोली- दिव्यांगों और बुजुर्गों की सेवा ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता
एमसीबी। छत्तीसगढ़ में मनाए जा रहे ‘सुशासन तिहार’ के बीच एमसीबी जिले से प्रशासनिक संवेदनशीलता और त्वरित न्याय की एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। साप्ताहिक जनदर्शन में अपनी फरियाद लेकर पहुंचे एक 85 प्रतिशत दिव्यांग बुजुर्ग की लाचारी देखकर कलेक्टर संतन देवी जांगड़े का दिल पसीज गया। उन्होंने बिना किसी कागजी लेत-लतीफी और अनावश्यक औपचारिकता के, मौके पर ही समाज कल्याण विभाग को निर्देश देकर हितग्राही के लिए मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल की स्वीकृति जारी करवा दी। प्रशासन के इस त्वरित कदम से जहां पीड़ित के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है, वहीं पूरे क्षेत्र में इसकी सराहना हो रही है।
जामथान से जनदर्शन तक: दर्द की वो दास्तान जिसने सबको झकझोरा
दरअसल, जनपद पंचायत भरतपुर के सुदूर वनांचल ग्राम जामथान (पोस्ट कॅजिया) के रहने वाले 55 वर्षीय छोटेलाल शारीरिक असमर्थता के चलते जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे थे। 85 प्रतिशत दिव्यांगता के कारण उनका चलना-फिरना दूभर था। रोज़मर्रा की ज़रूरतों और आवागमन के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। थक-हारकर वे अपनी इस बेबसी को लेकर जिला मुख्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में पहुंचे और कलेक्टर के सामने मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल के लिए गुहार लगाई।

कलेक्टर का कड़ा रुख: “सुशासन का मतलब कागजी औपचारिकता नहीं, तुरंत मिले राहत”
बुजुर्ग छोटेलाल की व्यथा सुनते ही कलेक्टर संतन देवी जांगड़े ने मामले को पूरी संवेदनशीलता से लिया। उन्होंने मौके पर ही समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को तलब किया। जब दस्तावेजों की जांच में छोटेलाल की ८५ प्रतिशत दिव्यांगता सही पाई गई, तो कलेक्टर ने साफ लहजे में कहा कि सुशासन तिहार की आत्मा यही है कि अंतिम व्यक्ति को बिना भटके उसका हक मिले। उन्होंने तुरंत मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करने के कड़े निर्देश दिए।
दिव्यांगजनों और बुजुर्गों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना हमारी प्रशासनिक प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि किसी भी पात्र हितग्राही को अपने हक के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
– संतन देवी जांगड़े, कलेक्टर
अब सफर आसान होगा”— छलक आए छोटेलाल के आंसू
जैसे ही छोटेलाल को यह पता चला कि उनकी मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल स्वीकृत हो गई है और अब उन्हें हाथ से साइकिल खींचने या दूसरों के भरोसे रहने की ज़रूरत नहीं होगी, उनके चेहरे पर एक असीम सुकून और खुशी तैर गई। जिला प्रशासन और कलेक्टर के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने भर्राए गले से कहा, “अब मेरा सफर आसान हो जाएगा। साहब ने मेरी तकलीफ को बिना देर किए समझ लिया।”
सुशासन तिहार का दिख रहा है जमीनी असर
एमसीबी जिले में चल रहे ‘सुशासन तिहार’ का असर अब सीधे जनता के चेहरों पर दिखने लगा है। जनदर्शन और शिविरों के माध्यम से समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट निपटारा किया जा रहा है। छोटेलाल को मिली यह त्वरित राहत केवल एक सरकारी सहायता नहीं है, बल्कि यह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अगर नियत साफ हो, तो प्रशासन जनता के लिए ‘माई-बाप’ की भूमिका बखूबी निभा सकता है।
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