आम आदमी पार्टी की फायरब्रांड नेत्री सुखमंती सिंह की धारदार शिकायत का 5 महीने बाद दिखा दमदार असर, बिजली विभाग में मची खलबली
मनेन्द्रगढ़ । क्षेत्र में जनता के हक की लड़ाई और शासकीय विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आम आदमी पार्टी (AAP) ने एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। विगत 20 वर्षों से मनेन्द्रगढ़ में एक ही मलाईदार पद पर ‘अंगद के पैर’ की तरह जमे लाइन इंस्पेक्टर यशवंत कुमार वारले का आखिरकार बोरिया-बिस्तर सिमट गया है। इसे ‘आप’ की प्रदेश उपाध्यक्ष व जिला पंचायत सदस्य (सभापति कृषि स्थाई समिति) सुखमंती सिंह की निरंतर और धारदार कानूनी लड़ाई की एक बड़ी जीत माना जा रहा है।
क्या था पूरा मामला और सुखमंती सिंह की वो ऐतिहासिक शिकायत ?
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी मर्यादित (CSPDCL) के उपसंभाग मनेन्द्रगढ़ द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के बाद लाइन सहायक श्रेणी-एक यशवंत कुमार वारले को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से ही क्षेत्र के भ्रष्ट और कामचोर कर्मचारियों के बीच हड़कंप का माहौल है।
आपको बता दें कि दिसंबर महीने में आम आदमी पार्टी की तेजतर्रार नेता सुखमंती सिंह ने कार्यपालन अभियंता को एक लिखित व बेहद आक्रामक शिकायत पत्र सौंपा था। इस शिकायत में उन्होंने सीधे तौर पर लाइन इंस्पेक्टर पर ग्रामीणों से ट्रांसफार्मर लगाने और नए बिजली कनेक्शन देने के नाम पर अवैध वसूली और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए थे।
कनेक्शन और ट्रांसफार्मर के नाम पर चल रहा था खेल:
सुखमंती सिंह ने अपनी शिकायत में प्रमुख रूप से उल्लेख किया था कि ग्राम देवगढ़, भुमका, तोजी, जोलगी, सनबोरा और मन्नीढ़ में महीनों से बिजली का ट्रांसफार्मर खराब पड़ा था। जब गरीब ग्रामीण इस समस्या को लेकर लाइन इंस्पेक्टर के पास जाते थे, तो उनसे साफ तौर पर कहा जाता था कि “जब तक पैसे नहीं दोगे, तब तक ट्रांसफार्मर नहीं लग पाएगा।” इतना ही नहीं, गरीबी रेखा (BPL) के तहत मिलने वाले मुफ्त कनेक्शनों के लिए भी असहाय ग्रामीणों से 4,000 से 5,000 रुपये ऐंठे जा रहे थे।
20 साल का साम्राज्य ध्वस्त, राजनीतिक संरक्षण भी नहीं आया काम:
सूत्रों के अनुसार, आरोपी कर्मचारी की नियुक्ति वर्ष 2003 में हुई थी और तब से लेकर आज तक वे मनेन्द्रगढ़ में ही मलाईदार पदों पर कुंडली मारकर बैठे थे। इस दौरान कई बार उनके ट्रांसफर के आदेश भी हुए, लेकिन ऊंचे रसूख और रिश्वत के खेल के दम पर वे हर बार अपने ट्रांसफर को रुकवाने में कामयाब हो जाते थे। परंतु इस बार आम आदमी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष सुखमंती सिंह की मजबूत पैरवी और पुख्ता सबूतों के आगे विभाग को झुकना पड़ा और पांच महीने की जांच के बाद आखिरकार इस तानाशाही साम्राज्य का अंत हो गया।
‘आप’ की पैनी नजर: भ्रष्ट अधिकारियों को सुखमंती सिंह की खुली चेतावनी
इस बड़ी सफलता पर क्षेत्र के ग्रामीणों ने श्रीमती सुखमंती सिंह का आभार जताते हुए इसे लोकतंत्र और जनता की जीत बताया है। वहीं सुखमंती सिंह ने स्पष्ट शब्दों में भ्रष्टाचारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि:
“आम आदमी पार्टी जनता के शोषण को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। क्षेत्र के हर उस शासकीय विभाग और अधिकारी-कर्मचारी पर ‘आप’ की पैनी नजर बनी हुई है जो जनता को परेशान करते हैं। यह तो बस शुरुआत है, आगे भी ऐसी दमनकारी नीतियों के खिलाफ शंखनाद जारी रहेगा।”
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