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शिक्षा जगत की बड़ी खबर: छत्तीसगढ़ के नौनिहाल बनेंगे ‘ग्लोबल सिटीजन’, रायपुर में FLN आधारित नई पाठ्यपुस्तकों का विशेष प्रशिक्षण संपन्न

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नई शिक्षा नीति 2020 का असर : अब रटने के बजाय ‘करके सीखने’ पर होगा जोर, कक्षा चौथी की पुस्तकों में हुआ बड़ा बदलाव

MCB के शिक्षकों ने रायपुर में सीखा बच्चों को ‘स्मार्ट’ बनाने का हुनर, बदल गया कक्षा 4 थी का सिलेबस

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर/मनेंद्रगढ़। छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की नींव रखी जा चुकी है। नई शिक्षा नीति 2020 के सपनों को धरातल पर उतारने के लिए SCERT रायपुर में एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस पांच दिवसीय गहन प्रशिक्षण (27 मार्च से 31 मार्च 2026) का मुख्य केंद्र बच्चों में रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और वैश्विक नागरिकता के गुणों को विकसित करना रहा।

रटने का दौर खत्म, अब होगा ‘अनुभवात्मक अधिगम’

​विशेषज्ञों के अनुसार, एनसीईआरटी और एससीईआरटी के संयुक्त प्रयासों से कक्षा पहली से चौथी तक की पाठ्यपुस्तकों को पूरी तरह से बदल दिया गया है। अब ये पुस्तकें केवल सूचनाओं का भंडार नहीं, बल्कि ‘थीम आधारित’ हैं।

  • नवाचार: आकलन (Assessment) में अब ‘चुनौती’ स्तर को शामिल किया गया है, जिससे बच्चे सक्रिय होकर तर्क और चिंतन कर सकेंगे।
  • FLN लक्ष्य: प्रारंभिक स्तर पर मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN) के लक्ष्यों को प्राप्त करना इस प्रशिक्षण का प्राथमिक उद्देश्य है।
  • प्रशिक्षण की कड़ी: राज्य स्तर पर प्रशिक्षित ये स्रोत व्यक्ति (DRG) अब अपने-अपने जिलों के विकासखंड स्रोत व्यक्तियों (BRG) को तराशेंगे।

नई पाठ्यपुस्तकें बच्चों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर उनके अनुभवों से जोड़ती हैं। यह बदलाव उन्हें एक जिम्मेदार वैश्विक नागरिक बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

प्रशिक्षण विशेषज्ञ, SCERT

MCB जिले के जांबाज ‘मास्टर्स’ ने संभाली कमान

इस राज्य स्तरीय प्रशिक्षण में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का प्रतिनिधित्व जिले के अनुभवी शिक्षाविदों ने किया। जिले की टीम में रोशनी श्रीवास्तव, रुद्रप्रताप सिंह राणा, मो. अशफाक,  प्रियंका सिंह बघेल, श्रीमती आशा चंद्रा, संतोष शर्मा (CAC) और कालेश्वर पैंकरा (APC) शामिल रहे।

​ये सभी प्रशिक्षक अब जिले के हर ब्लॉक में शिक्षकों को इस नई पद्धति से रूबरू कराएंगे, ताकि छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों में पढ़ रहे बच्चों को भी विश्वस्तरीय शिक्षा पद्धति का लाभ मिल सके।

​शिक्षा के क्षेत्र में यह बदलाव केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कक्षा के वातावरण को जीवंत बनाने की एक ईमानदार कोशिश है। आने वाले सत्र में बच्चे अब नई उमंग और नई पुस्तकों के साथ एक नए भविष्य की ओर कदम बढ़ाएंगे।

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