रविकांत सिंह राजपूत। नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर। जिले के छोटे से कस्बे जनकपुर की पगडंडियों से निकलकर दर्शना सिंह (ग्रेसी) ने देश के सबसे ऊंचे प्रशासनिक गलियारे तक का सफर तय किया है। यूपीएससी में 383वीं रैंक हासिल कर दर्शना न केवल आईपीएस के लिए चयनित हुई हैं, बल्कि वे सरगुजा संभाग से आईपीएस बनने वाली पहली युवती भी बन गई हैं। नई पहल से खास बातचीत में दर्शना ने बताया कि उनके इस सफर में कोसा की साड़ी से लेकर ‘अपनों के दिए लैपटॉप तक का बड़ा योगदान रहा। बातचीत में अपनी सफलता के उन राजों को साझा किया, जो आज हर परीक्षार्थी के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में जब गांव वाले और पिता उन्हें कलेक्टर-एसपी बनने का कहते थे, तभी उन्होंने ठान लिया था कि वे इस सपने को सच करेंगी। इस सफलता की सबसे भावुक तस्वीर दिल्ली स्थित यूपीएससी कार्यालय के बाहर उस वक्त दिखी, जब दर्शना इंटरव्यू देने अंदर गईं और उनके पिता अरुण सिंह व माता सीमा सिंह बाहर अपनी धड़कनें थामे इंतजार कर रहे थे।

13 फरवरी, सेवा तीर्थ और कोसा सिल्क
दर्शना ने नई पहल को बताया कि इंटरव्यू पैनल ने उनसे करीब 30 सवाल पूछे। सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब कोसा सिल्क पर सवाल हुआ। पैनल ने कोसा सिल्क की खासियत पूछी। दर्शना ने गर्व से मुस्कुराते हुए कहा, सर, छत्तीसगढ़ का कोसा विश्व प्रसिद्ध है और आज मैंने जो साड़ी पहनी है, वह भी कोसा सिल्क ही है।
इंटरव्यू में 13 फरवरी की महत्ता पूछी गई तो दर्शना ने पीएम मोदी द्वारा सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन के उद्घाटन को प्रशासनिक सुधार का मील का पत्थर बताया।
मेस सेक्रेटरी के अनुभव ने किया मदद
आईआईटी कानपुर में पढ़ाई के दौरान दर्शना हॉस्टल की मेस सेक्रेटरी थीं। इंटरव्यू में जब हॉस्टल के खाने पर सवाल हुआ, तो उन्होंने प्रोटीन युक्त आहार और स्वच्छता’ का ऐसा खाका पेश किया कि पैनल उनकी प्रशासनिक सोच का कायल हो गया।
दर्शना के पिता अरुण सिंह और माता सीमा सिंह ने हमेशा अपनी बेटी पर भरोसा जताया। दर्शना ने अपनी प्राथमिक शिक्षा भगवानपुर के मुख्यमंत्री डीएवी पब्लिक स्कूल से पूरी की। और हर बार स्कूली शिक्षा के दौरान वह अव्वल रही है।
यूपीएससी 2026 के लिए भर दिया फार्म
दर्शना ने नई पहल को बताया कि उसने दो हफ्ते पहले ही यूपीएससी परीक्षा 2026 का फार्म भरा है। दर्शना ने कहा कि, मेरा एकमात्र लक्ष्य आईएएस बनना है। पापा और गांव वाले मुझे बोलते थे कि ये बेटी कलेक्टर एसपी बनेगी। मैने आईपीएस तो बनकर दिखा दिया अब अपनी मेहनत और सभी के आशीर्वाद से आईएएस बनकर सभी का अपना पूरा करूंगी। 2025 के परिणाम से पहले ही मैने यूपीएससी 2026 की तैयारी शुरू कर दी है।
जब पढ़ाई के लिए अपनों ने बढ़ाया हाथ
दर्शना की मेधा को निखारने में समाज का भी बड़ा योगदान रहा। उन्होंने बताया कि पढ़ाई में होनहार होने के कारण उन्हें हमेशा अपनों का साथ मिला जनकपुर के राजेश मिश्रा जो सिविल कांट्रेक्टर उन्होंने आईआईटी से लेकर यूपीएससी तक की पढ़ाई के लिए दर्शना को तीन बार नया लैपटॉप गिफ्ट किया। इसी तरह जनकपुर के ही दुर्गाशंकर मिश्रा जो पूर्व जनपद उपाध्यक्ष उन्होंने समय-समय पर प्रोत्साहित करने उत्साहवर्धन करने आर्थिक सहयोग और आशीर्वाद देकर दर्शना का हौसला बढ़ाया।
विधायक रेणुका सिंह का बड़ा ऐलान: स्वस्थ होते ही करूँगी भव्य स्वागत
भरतपुर सोनहत विधानसभा की क्षेत्रीय विधायक और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह ने दर्शना को फोन पर बधाई दी है। नई पहल से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पैर में फ्रैक्चर होने के कारण वह अभी नहीं पहुंच पा रही हैं, लेकिन स्वस्थ होते ही वह दर्शना के घर जाकर उसका नागरिक अभिनंदन करेंगी। उन्होंने कहा कि यह सफलता पूरे सरगुजा संभाग के लिए गौरव का विषय है।
मेरी इस सफलता का श्रेय मेरे माता-पिता और जनकपुर की उस मिट्टी को जाता है, जिसने मुझे बड़े सपने देखने का हौसला दिया। पापा मुझे बचपन से ही कलेक्टर-एसपी बनने के लिए बोलते थे, वो शब्द मेरे कान में मंत्र की तरह गूंजते थे। जब पहले प्रयास में इंटरव्यू के बाद सिलेक्शन नहीं हुआ, तो थोड़ा दुख जरूर हुआ, लेकिन मन में यह दृढ़ संकल्प था कि इस बार सफल होकरही लौटना है। इंटरव्यू के दौरान जब मुझसे छत्तीसगढ़ के कोसा सिल्क के बारे में पूछा गया, तो मुझे बहुत गर्व महसूस हुआ। मैंने गर्व से उन्हें बताया कि आज मैंने जो साड़ी पहनी है, वह मेरे प्रदेश की पहचान है। मुझे खुशी है कि मैं एक ग्रामीण परिवेश से आने के बावजूद सरगुजा संभाग की बेटियों के लिए एक छोटा सा उदाहरण पेश कर पाई हु।
– दर्शना सिंह
बाकी अभ्यर्थी आधे घंटे में लौटे, दर्शना ने लिया पूरा 1 घंटा इंटरव्यू के उस दिन को याद कर पिता अरुण सिंह और माता सीमा सिंह भावुक हो उठते हैं। उन्होंने बताया
हम दिल्ली में यूपीएससी ऑफिस के बाहर खड़े थे। एक-एक कर अभ्यर्थी 25-30 मिनट में बाहर आ रहे थे। दर्शना को अंदर गए पूरा एक घंटा बीत चुका था। हमारी धड़कनें बढ़ रही थीं। तभी दर्शना मुस्कुराते हुए विक्ट्री साइन दिखाते हुए बाहर निकली। उसने आते ही कहा, पापा, इंटरव्यू बहुत शानदार रहा, मेरा सिलेक्शन पक्का है। उसकी आंखों में वो आत्मविश्वास देखकर हमें तभी यकीन हो गया था कि हमारी बेटी अब अफसर बन चुकी है।
– दर्शना सिंह के माता पिता
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