अजीब दास्तान : भाजपा नेता ने उछाला पार्षदों पर कीचड़, तो पत्नी के सहकर्मियों ने ही खोल दिया थाने का दरवाजा, सियासत और साख की लड़ाई हुई बेपर्दा
नई पहल न्यूज नेटवर्क। चिरमिरी। राजनीति में अक्सर दुश्मन बाहर होते हैं, लेकिन चिरमिरी नगर निगम में इस वक्त एक ऐसी ‘जंग’ छिड़ी है जहाँ लक्ष्मण रेखा घर के अंदर तक खिंच गई है। भाजपा के सक्रिय नेता प्रदीप सलूजा द्वारा अपनी ही पार्टी और विपक्ष के पार्षदों पर लगाए गए ‘रिश्वतखोरी’ के आरोपों ने एक ऐसा सियासी बवंडर खड़ा कर दिया है, जिसकी जद में अब उनका अपना ही कुनबा आता दिख रहा है।
जब मर्यादा और दलगत राजनीति में छिड़ी जंग
यह खबर महज एक शिकायत की नहीं है, बल्कि उस विरोधाभास की है जिसने भाजपा के भीतर की दरार को सड़क पर ला दिया है। प्रदीप सलूजा की पत्नी खुद भाजपा से पार्षद हैं और पार्टी की रीढ़ मानी जाती हैं। लेकिन आज हालात ये हैं कि उनके पति के खिलाफ थाने पहुंचने वालों में भाजपा के अपने ही पार्षद सबसे आगे खड़े हैं।
शहर में चर्चा का विषय :
- निशाने पर ‘अपना’ ही कुनबा: सलूजा ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि माइंस परियोजना के लिए पार्षदों ने “आंख मूंदकर और जेबें भरकर” साइन किए हैं।
- सम्मान की खातिर ‘पार्टी’ गौण: कांग्रेस समेत भाजपा पार्षदों ने यह साफ कर दिया कि जब बात चरित्र और ईमानदारी पर आएगी, तो आरोपी चाहे घर का हो या बाहर का, बख्शा नहीं जाएगा।
महापौर और सभापति का ‘मास्टरस्ट्रोक’
महापौर रामनरेश राय और सभापति संतोष सिंह ने इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भाजपा नेता के खिलाफ भाजपा के साथ कांग्रेस के ही पार्षदों को एकजुट कर उन्होंने यह संदेश दे दिया है कि भ्रष्टाचार के आरोपों पर अब ‘आर-पार’ की लड़ाई होगी।



पार्षदों की सामूहिक गर्जना: “हम जनता के प्रतिनिधि हैं, किसी की सोशल मीडिया पोस्ट के मोहरे नहीं। अगर सलूजा के पास सबूत हैं तो पेश करें, वरना कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।”
चिरमिरी की गलियों में सुलगते सवाल ?
- क्या यह गुटबाजी का चरम है? क्या भाजपा के अंदरूनी कलह ने अब इतना विकराल रूप ले लिया है कि मामला थाने तक पहुंच गया?
- पत्नी की स्थिति क्या? एक तरफ पति के खिलाफ मोर्चा, दूसरी तरफ साथ काम करने वाले पार्षद साथी— भाजपा की महिला पार्षद के लिए यह अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
- संगठन की चुप्पी: इस पूरे हाई-प्रोफाइल ड्रामे पर भाजपा संगठन का अगला कदम क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
साख पर भारी ‘सियासी महत्वाकांक्षा’
प्रदीप सलूजा ने अपनी पोस्ट से जिस मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाला है, उसने अब उन्हें ही डंक मारना शुरू कर दिया है। यह मामला अब केवल एक ‘सोशल मीडिया पोस्ट’ का नहीं रह गया, बल्कि चिरमिरी की राजनीति में ‘नैतिकता बनाम आरोप’ की एक ऐसी मिसाल बन गया है जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।




