जन का विश्वास खोता जनदर्शन : भ्रष्टाचार की शिकायत पर ऐसी ‘लापरवाह’ जांच, क्या न्याय की उम्मीद करेगा फरियादी ? जो अधिकारी रायपुर के आरंग में हैं SDM, उन्हें MCB जनदर्शन ने बनाया जांच अधिकारी
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़/रायपुर। छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में प्रशासनिक लापरवाही का एक ऐसा नमूना सामने आया है, जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। जिला कलेक्टर के ‘जनदर्शन’ में अपनी फरियाद लेकर पहुंचने वाले आम आदमी को न्याय मिलेगा या नहीं, यह तो दूर की बात है, लेकिन यहां का सिस्टम ‘भूतकाल’ में जी रहा है। कलेक्टर जनदर्शन के आधिकारिक पोर्टल पर एक ताजा शिकायत की जांच की जिम्मेदारी उस अधिकारी को दे दी गई है, जिनका जिले से तबादला हुए 2 साल से अधिक का समय बीत चुका है।

क्या है पूरा मामला ?
हल्दीबाड़ी चिरमिरी निवासी राजकुमार मिश्रा ने 20 जनवरी 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत ‘शासकीय स्वेच्छा अनुदान’ की राशि के दुरुपयोग से जुड़ी थी, जिसमें अपात्रों को लाभ देकर राजनीतिक फायदा उठाने के आरोप लगाए गए थे। आवेदन क्रमांक 2290126000068 के तहत इस मामले की उचित कार्रवाई की मांग की गई थी।
सिस्टम की बड़ी चूक या सोची-समझी लापरवाही ?
दस्तावेज के अनुसार, इस संवेदनशील शिकायत की जांच हेतु ‘अभिलाषा पैकरा’ को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि अभिलाषा पैकरा वर्तमान में रायपुर जिले के आरंग में संयुक्त कलेक्टर एवं SDM के पद पर पदस्थ हैं। वे 2 साल पहले मनेंद्रगढ़ में SDM थीं। अब सवाल यह उठता है कि क्या MCB प्रशासन को यह भी नहीं पता कि उनके जिले में कौन से अधिकारी पदस्थ हैं?
कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर गहराता शक
जब जनदर्शन जैसे महत्वपूर्ण मंच पर शिकायतों का निपटारा इतने गैर-जिम्मेदाराना तरीके से किया जा रहा हो, तो आम जनता का प्रशासन से विश्वास उठना लाजमी है।



- दूरी का सवाल: रायपुर में बैठा अधिकारी मनेंद्रगढ़ की नाजीर शाखा की जांच कैसे करेगा?
- अपडेटेड पोर्टल: क्या कलेक्टर कार्यालय का ऑनलाइन पोर्टल 2 साल से अपडेट नहीं हुआ है?
- जन का विश्वास: मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप शुरू हुए ‘जनदर्शन’ को क्या अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति का जरिया बना चुके हैं?
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्टिंग
पोर्टल पर विभाग का नाम ‘नाजीर शाखा कार्यालय कलेक्टर’ और मुख्य विभाग ‘राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग’ दर्शाया गया है। पत्र की स्थिति अभी ‘अपूर्ण’ दिख रही है, जो सिस्टम की सुस्ती को बयां कर रही है।




