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अब और नहीं सहेगा सोनहत : ‘हुंकार’ का महाशंखनाद : न राजनीति, न प्रलोभन, हक के लिए उमड़ा जन-सैलाब, बदहाल व्यवस्था के खिलाफ कोरिया जन सहयोग समिति का मोर्चा

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नई पहल न्यूज नेटवर्क। कोरिया/सोनहत। सोनहत की फिजाओं में बुधवार को एक अलग ही गूँज सुनाई दी। यह गूँज किसी राजनीतिक दल के शक्ति प्रदर्शन की नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और बुनियादी अधिकारों के लिए लड़ रही जनता की ‘हुंकार’ थी। कोरिया जन सहयोग समिति के नेतृत्व में आयोजित इस महा-अभियान ने सोनहत के इतिहास में नया अध्याय लिख दिया। बदहाल सड़कें, अंधेरे में डूबे गांव और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ सैकड़ों ग्रामीणों ने हुंकार भरते हुए एसडीएम कार्यालय का घेराव किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

इतिहास में दर्ज हुआ ‘गैर-राजनीतिक’ जनसैलाब

सोनहत के बुजुर्गों और जानकारों की मानें तो दशकों बाद किसी गैर-राजनीतिक मंच पर ऐसी स्वतः स्फूर्त भीड़ देखी गई। लोग पैदल और अपने निजी साधनों से मीलों दूर से पहुंचे थे। यह जन-सैलाब इस बात का प्रमाण था कि अब जनता फाइलों में दर्ज ‘कागजी विकास’ से संतुष्ट होने वाली नहीं है।

अंधेरे और डिजिटल दूरी के खिलाफ आर-पार की जंग

​समिति ने प्रशासन को आईना दिखाते हुए कई गंभीर मुद्दे उठाए:

  • बिजली और नेटवर्क: नावटोला, कचोहर और चंदहा जैसे गांवों में विद्युतीकरण और रामगढ़-मेण्ड्रा क्षेत्र में मोबाइल टावर की तत्काल मांग की गई।
  • सड़कों का जाल: रामगढ़-कोटाडोल (27 किमी) पक्की सड़क और मेण्ड्रा से अमहर तक नए मार्ग के निर्माण को क्षेत्र की जीवनरेखा बताया गया।
  • मितानिनों का सम्मान: स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मितानिन बहनों के लंबित मानदेय और मितानिन भवन को हैंडओवर करने की मांग पर जोर दिया गया।

सामाजिक न्याय: पंडो जनजाति और वन अधिकार

​समिति ने विशेष रूप से पंडो जनजाति के लिए जाति प्रमाण पत्र शिविर लगाने और लोलकी व उरांव पारा को ‘राजस्व ग्राम’ घोषित करने की मांग की। वरिष्ठ कानूनी सलाहकारों ने चेतावनी दी कि यदि पंडो जनजाति को उनका संवैधानिक अधिकार नहीं मिला, तो मामला उच्च न्यायालय तक जाएगा।

नेतृत्वकर्ताओं के ‘तीखे बाण’:

  • पुष्पेंद्र राजवाड़े (अध्यक्ष): “बुनियादी सुविधाएं खैरात नहीं, हमारा अधिकार हैं। जब तक हर घर में रोशनी नहीं, तब तक चैन नहीं।”
  • कृष्णा सिंह बाबा (पत्रकार ): “मितानिनों का मानदेय रोकना और जनसुविधाओं की अनदेखी दुखद है। हम इस आवाज़ को शासन की सर्वोच्च चौखट तक पहुँचाएंगे।”
  • जयचन्द सोनपाकर व संजय साहू (अधिवक्ता): “लोलकी और उरांव पारा आज भी नक्शे से बाहर हैं, यह गंभीर अन्याय है। हम सड़क और कानून दोनों लड़ाइयां लड़ेंगे।”
  • राजन पाण्डेय (संरक्षक): “विकास बंद कमरों में नहीं, गांव की धूल में बैठकर बनना चाहिए। यह अभियान प्रशासन के लिए ध्यानाकर्षण और जनता के लिए अधिकार पाने का आह्वान है।”

मैदान में उतरे तहसीलदार, दिया आश्वासन

​आंदोलन की तीव्रता को देखते हुए तहसीलदार संजय राठौर स्वयं सभा स्थल पर पहुंचे। समिति के सदस्यों ने उन्हें मांगों का पुलिंदा सौंपा। तहसीलदार ने कई मांगों को जायज ठहराते हुए उनके तत्काल निराकरण का आश्वासन दिया और अन्य महत्वपूर्ण विषयों को शासन स्तर पर भेजने की बात कही।

  • विद्युतीकरण: कछाड़ी से जोगिया तक बिजली विस्तार की मांग।
  • शिक्षा व खेल: सलगवां, रामगढ़ मिनी स्टेडियमों का अधूरा निर्माण पूर्ण करने पर जोर।
  • राजस्व ग्राम: नक्शे से छूटे गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की अपील।
  • उपस्थिति: अधिवक्ता अरविंद सोनी, रजा अली अंसारी, सम्पादक सम्वर्त कुमार रुप, राजू साहू, राजकुमार साहू, मितानिन संगठन से सोनमति साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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