मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की पहली महिला पुलिस कप्तान की संवेदनशीलता, मकान मालिक ने रोके थे 10 हज़ार रुपए, पुलिस की कार्यवाही की हो रही सराहना
नई पहल न्यूज नेटवर्क। चिरमिरी। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में पहली बार पदस्थ महिला पुलिस कप्तान रत्ना सिंह की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई ने एक घरेलू कामगार को दो साल से फंसे उसके बकाया वेतन की राशि दिलवाकर पुलिस के मानवीय चेहरे को उजागर किया है। एसपी रत्ना सिंह के निर्देश पर, थाना प्रभारी विजय सिंह ने तत्काल कार्रवाई करते हुए शांति बाई नामक महिला को न्याय दिलवाया, जो पिछले चार माह से अपने काम का पैसा न मिलने से परेशान थी। पुलिस ने मकान मालिक को थाना तलब किया और सुनिश्चित किया कि शांति बाई को उसका पूरा ₹10,000 बकाया वेतन मिल जाए। पुलिस की इस मानवीय पहल की पूरे जिले में जमकर सराहना हो रही है।
दो साल की सेवा, चार महीने से वेतन रुका
जानकारी के अनुसार, शांति बाई नामक महिला पिछले दो साल से गोदरीपारा निवासी संदीप प्रधान के घर में बरौनी (बर्तन मांजने और झाड़ू-पोंछा) का काम कर रही थी। हालाँकि, बीते चार महीनों से मकान मालिक द्वारा उसे उसका वेतन नहीं दिया जा रहा था, जिससे शांति बाई को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। मामला जब पुलिस कप्तान रत्ना सिंह के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इस सामाजिक और मानवीय मुद्दे को गंभीरता से लिया।
एसपी के निर्देश पर तत्काल हुई कार्रवाई
पुलिस कप्तान रत्ना सिंह के संवेदनशीलता पूर्ण निर्देश पर, थाना प्रभारी चिरमिरी विजय सिंह ने बिना देर किए मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने तत्काल प्रभाव से मकान मालिक संदीप प्रधान को थाने तलब किया। थाना प्रभारी ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की और मानवीय आधार पर मकान मालिक को समझाया कि कामगार का वेतन रोकना उचित नहीं है। पुलिस के हस्तक्षेप का यह नतीजा रहा कि मकान मालिक को तुरंत ₹10,000 की बकाया राशि का भुगतान करना पड़ा, जिससे शांति बाई को बड़ी राहत मिली। जिले की पुलिस कप्तान की इस पहल को जनता और न्याय के बीच की दूरी कम करने वाला कदम माना जा रहा है।








