पूर्व विधायक गुलाब कमरो के निर्देश पर सांसद प्रतिनिधि अविनाश पाठक ने जिला प्रशासन से तत्काल मरम्मत की मांग उठाई

नई पहल न्यूज नेटवर्क। सोनहत। जहां केंद्र और राज्य सरकारें हर घर तक बिजली पहुंचाने का दावा कर रही हैं, वहीं सोनहत क्षेत्र के कई वनांचल गांव आज भी अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (क्रेडा-CREDA) द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के रूप पर लगाए गए लाखों रुपये के सोलर प्लांट और घरेलू लाइटें देखरेख के अभाव में पिछले कई महीनों से खराब पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और क्षेत्र में पसरी यह समस्या सरकारी दावों की जमीनी हकीकत बयां करती है। सोनहत क्षेत्र के रामगढ़, उज्ञायओ, आनंदपुर, रावत सरई, पत्थरगवां जैसे कई वनांचल गांवों में शाम ढलते ही पूरे गांव में अंधेरा छा जाता है। इन गांवों में रोशनी की उम्मीद जगाने वाले सोलर प्लांट और सिस्टम अब सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। ग्रामीणों की दैनिक जीवन की मुश्किलें और सुरक्षा संबंधी चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, पूर्व विधायक गुलाब कमरो जी के निर्देश पर, उनके सांसद प्रतिनिधि ने तत्काल जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर खींचा है और खराब पड़े प्लांटों की युद्ध स्तर पर मरम्मत कराने की मांग की है।
समस्या की जड़ : रखरखाव का अभाव
जिन दुर्गम वनांचल गांवों तक बिजली की मुख्य लाइन नहीं पहुँच पाई थी, वहाँ ग्रामीणों को रोशनी देने के लिए क्रेडा ने ये सोलर सिस्टम स्थापित किए थे।
- शुरुआत में उम्मीद: इन प्लांटों से गांवों में उम्मीद की किरण जगी थी और रोशनी भी मिली थी।
- वर्तमान स्थिति: लेकिन लंबे समय तक देखरेख और रखरखाव के अभाव के कारण ये प्लांट खराब होते चले गए।
- ग्रामीणों का दर्द: ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि अंधेरा छा जाने से न केवल उनके घरेलू काम प्रभावित होते हैं, बल्कि खासकर बरसात के मौसम में साँप-बिच्छू के खतरे और राहगीरों के लिए मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं।
सांसद प्रतिनिधि की सख्त मांग
सांसद प्रतिनिधि ने जिला प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकारें बड़ी-बड़ी बातें करती हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण अंधेरे में जीवन जीने को अभिशप्त हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि:
- संबंधित विभाग (क्रेडा) इन खराब पड़े सोलर प्लांटों का तत्काल सर्वे कराए।
- जल्द से जल्द इनकी मरम्मत या इन्हें बदलने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।



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