पहले भाजयुमो नेता ने की थी जिलाध्यक्ष की ‘सिफारिश’ अब सांसद का वीडियो लीक, आंतरिक कलह उजागर !
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर/सरगुजा। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के महत्वाकांक्षी ‘संगठन सृजन अभियान’ को लेकर एक के बाद एक वीडियो लीक होने से पार्टी के भीतर हड़कंप मच गया है। ताजा मामला सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज से जुड़ा है, जिनकी संगठन की गोपनीय बैठक के दौरान का वीडियो सोशल मीडिया पर ‘आग की तरह’ फैल रहा है। यह वीडियो उस वक्त आया है, जब कुछ दिन पहले ही मनेंद्रगढ़ जिले में कांग्रेस के ऑब्जर्वर (पर्यवेक्षक) को जिलाध्यक्ष पद के लिए अपनी पसंद बताते हुए एक भाजयुमो (भारतीय जनता युवा मोर्चा) नेता का वीडियो भी वायरल हुआ था।

आंतरिक मंथन की पारदर्शिता और गोपनीयता दोनों खतरे में
कांग्रेस जहां एक तरफ अपने संगठन को मजबूत करने के लिए पूरे प्रदेश में ‘संगठन सृजन अभियान’ चला रही है, वहीं दूसरी तरफ बैठकों के अंदरूनी दृश्य और गोपनीय चर्चाएं लगातार लीक होकर पार्टी की रणनीति और आंतरिक अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज का यह नया वायरल वीडियो, मनेंद्रगढ़ की घटना के बाद, दर्शाता है कि कांग्रेस के आंतरिक मंथन की पारदर्शिता और गोपनीयता दोनों खतरे में हैं। यह घटना बताती है कि पार्टी के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच चल रही चर्चाएं बाहरी तत्वों या असंतुष्ट गुटों द्वारा लगातार सार्वजनिक की जा रही हैं, जो आगामी राजनीतिक चुनौतियों से पहले पार्टी के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर सकता है।
संगठन सृजन पर उठा बड़ा सवाल
सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज के इस वायरल वीडियो की सामग्री भले ही आधिकारिक तौर पर स्पष्ट न हो, लेकिन इसका लीक होना ही गंभीर है। वहीं, मनेंद्रगढ़ में भाजयुमो के नेता द्वारा कांग्रेस के ऑब्जर्वर को जिलाध्यक्ष के लिए नाम सुझाना—और उस बातचीत का रिकॉर्ड होना—स्पष्ट करता है कि विपक्षी दल भी कांग्रेस के आंतरिक मामलों में रुचि ले रहे हैं या उन्हें पार्टी की अंदरूनी जानकारी मिल रही है। ये लगातार सामने आ रहे वीडियो फुटेज न केवल कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ की गंभीरता को कम कर रहे हैं, बल्कि यह भी संकेत दे रहे हैं कि शीर्ष नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच संवाद और विश्वास का भारी अभाव है। आलाकमान के लिए अब इन वीडियो लीक की जांच और गोपनीयता भंग करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करना आवश्यक हो गया है, ताकि पार्टी की छवि और अनुशासन को बचाया जा सके।




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