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सोनहत का ‘रावण दहन’ विवाद बना सियासी ‘रणभूमि’: दो FIR से गरमाई राजनीति !

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वर्तमान विधायक रेणुका सिंह और पूर्व विधायक गुलाब कमरो के समर्थक आमने-सामने, दशहरा उत्सव पर वर्षों की परंपरा में पहली बार हुआ ऐसा गतिरोध

नई पहल न्यूज नेटवर्क। सोनहत (कोरिया)। विजयादशमी पर्व पर सालों से शांतिपूर्वक होते आ रहे रावण दहन के कार्यक्रम ने इस बार सियासी चिंगारी पकड़ ली है। भरतपुर-सोनहत की वर्तमान विधायक एवं पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह और पूर्व विधायक गुलाब कमरो के समर्थकों के बीच यह विवाद अब कानूनी शिकंजे में आ चुका है, जिसमें दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ थाने में मामला दर्ज कराया है। इस ‘रावण पर राजनीतिक रण’ ने क्षेत्र का माहौल गरमा दिया है, और यह देखना बाकी है कि यह जंग कब और कहाँ ख़त्म होती है।

विजयादशमी के बाद भी जारी है ‘विवाद का दहन’

जो उत्सव बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक था, वह अब राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई का अखाड़ा बन गया है। पहले, विधायक रेणुका सिंह के कथित दबाव पर पुलिस ने नवरत्न पांडेय की शिकायत पर तरुण साहू, प्रदीप साहू और राधे साहू के ख़िलाफ़ अपराध दर्ज किया। इसके जवाब में, पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने अपने समर्थकों के साथ सीधे सोनहत थाना पहुँचकर न्यायसंगत कार्रवाई की माँग की। इसका परिणाम यह हुआ कि कमरो समर्थक तरुण साहू की शिकायत पर अब पुलिस ने विधायक समर्थकों— नवरत्न पांडेय, दिनेश सिंह और हर्ष साहू के ख़िलाफ़ भी अपराध दर्ज कर लिया है। एक ही घटना पर दर्ज इन दो अलग-अलग प्राथमिकियों ने साबित कर दिया है कि यह मामला अब सियासी तूल पकड़ चुका है।

FIR के आईने में सियासी तकरार

एक ओर, पहले दर्ज हुई FIR (जिसमें तरुण साहू पक्ष पर मामला दर्ज हुआ) के पीछे वर्तमान विधायक रेणुका सिंह का दबाव बताया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर, दर्ज हुई ताज़ा FIR में, शिकायतकर्ता तरुण साहू (शिकायत में उल्लेखित पता: ग्राम सोनहत) ने विधायक खेमे के नवरत्न पांडेय, दिनेश सिंह और हर्ष साहू के ख़िलाफ़ शिकायत की है। FIR की प्रति में आरोपी के नाम, पिता का नाम और पता (सोनहत, कोरिया) स्पष्ट रूप से दर्ज हैं, जिससे यह साफ है कि दोनों पक्षों के लोग स्थानीय और राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं।

वर्षों की शांति भंग, क्षेत्रवासियों में चिंता

​क्षेत्रवासियों का कहना है कि सोनहत में रावण दहन का कार्यक्रम वर्षों से होता आ रहा है और आज तक कभी भी ऐसी असहज स्थिति या बड़ा विवाद पैदा नहीं हुआ। इस बार की घटना ने धार्मिक और सामाजिक आयोजन को भी राजनीतिक खींचतान का शिकार बना दिया है।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह घटना आगामी स्थानीय चुनावों से पहले दोनों प्रमुख नेताओं के बीच शक्ति प्रदर्शन का ज़रिया बन गई है। पुलिस के सामने अब यह चुनौती है कि वह सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के दबाव से मुक्त होकर निष्पक्ष और न्यायसंगत कार्रवाई कैसे करे, ताकि यह ‘राजनीतिक रण’ जल्द से जल्द समाप्त हो सके।

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