
नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। बरसात की रौनक के साथ प्रकृति की गोद में बसा अमृतधारा जलप्रपात इस समय अपनी पूर्ण भव्यता पर है। झरने की गर्जन, हरियाली का विस्तार और चट्टानों से गिरती 100 फीट ऊंची जलधारा पर्यटकों के लिए अद्भुत दृश्य पेश कर रही है। लेकिन इस सौंदर्य के बीच एक भयावह सच्चाई भी छिपी है— यह खूबसूरत स्थल प्रशासन की लापरवाही के कारण एक खतरनाक जाल में तब्दील हो गया है।
प्राकृतिक आपदा या मानवीय चूक

किसी भी क्षण बड़ा हादसा यहां घट सकता है। बारिश के मौसम में झरने के किनारे लगी लोहे की रेलिंग तेज बहाव में टूटकर बह चुकी है, लेकिन प्रशासन सोया पड़ा है। ऐसे संवेदनशील स्थान पर जहां हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं, वहां न सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं, न चेतावनी बोर्ड, और न ही निगरानी कर्मी। कुछ महीने पहले प्रशासन ने खानापूर्ति करते हुए अस्थायी बैरिकेड्स जरूर लगाए थे, जो अब नदारद हैं। नतीजा यह है कि पर्यटक तेज धार वाले झरने के मुहाने पर जाकर सेल्फी लेने में जुटे हैं, जिससे हर पल हादसे का खतरा मंडरा रहा है। एक चूक, एक फिसलन और जिंदगी खत्म— लेकिन जिम्मेदार अफसरों की आंखें अभी भी नहीं खुली हैं।
प्रशासन की अनदेखी: पर्यटकों की जान पर भारी
इस खतरनाक हालात को लेकर जब स्थानीय ग्रामीणों और समाजसेवियों ने प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया, तो कुछ दिन की गतिविधियां दिखाकर फिर से मौनव्रत धारण कर लिया गया। न कोई स्थायी सुरक्षा घेरा, न ही मार्गदर्शन देने वाले कर्मी— यह घोर प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत उदाहरण है। क्या जिला प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है? क्या अमृतधारा जैसे प्रमुख पर्यटक स्थल को सुरक्षा देने की प्राथमिकता सिर्फ फाइलों तक सीमित रह गई है?
वर्षा के आँकड़े— झरने में बढ़ते खतरे का संकेत
जिले में अब तक 582.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि कोटाडोल में सबसे अधिक 740.1 मिमी वर्षा हो चुकी है। बीते 24 घंटे में भी 40.9 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जिससे जलप्रपात की धार और भी प्रचंड हो गई है। ऐसे में पर्यटकों का करीब जाना आत्मघाती कदम है।
तहसीलवार वर्षा विवरण :
मनेंद्रगढ़ – 602.4 मिमी
खड़गवां – 486.8 मिमी
चिरमिरी – 537.7 मिमी
केल्हारी – 464.5 मिमी
भरतपुर – 663.1 मिमी
कोटाडोल – 740.1 मिमी
नई पहल की अपील: मौत से पहले चेत जाए प्रशासन
“प्राकृतिक सौंदर्य से सजे अमृतधारा को ‘अकाल मृत्यु का ठिकाना’ बनने से रोका जाए।”
नई पहल न्यूज़ प्रशासन से मांग करता है कि—
झरने के आसपास स्थायी और मजबूत रेलिंग तत्काल लगाई जाए।
सुरक्षा कर्मियों की नियमित तैनाती की जाए।
चेतावनी बोर्ड और दिशा निर्देशों के माध्यम से जनजागरूकता बढ़ाई जाए।
मानसून के दौरान सीमित पहुंच व्यवस्था लागू की जाए।
हर साल ऐसे जलप्रपातों में होने वाले हादसे प्रशासन की अनदेखी के परिणाम होते हैं। अब वक्त है— जागने का, सजग होने का, और जिम्मेदारी निभाने का। अमृतधारा की सुंदरता को सुरक्षित रखिए, कहीं यह खूबसूरती किसी की मौत की वजह न बन जाए।


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