छत्तीसगढ़ बाल आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की अनूठी पहल: महिला जेल और बालिका गृह में बच्चों संग मनाई अनोखी दीपावली

Share this post:

  • अपनत्व का दीपोत्सव: छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने खम्हारडीह बालिका गृह और महिला जेल पहुंचकर बच्चों के साथ मनाई खुशियों की दीपावली।
  • सपनों को नई उड़ान: महिला बंदियों के बच्चों और बालिका गृह की बच्चियों से संवाद कर उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य के सपनों पर की खास चर्चा।
  • भावुक क्षण: बच्चियों द्वारा अपने हाथों से बनाए गए सुंदर दीये और हस्तनिर्मित सामग्रियां अध्यक्ष को भेंट, देखकर सभी हुए मंत्रमुग्ध।
  • खुशी का शानदार प्रदर्शन: कार्यक्रम के दौरान ‘खुशी’ नामक बच्ची की प्रतिभा और आत्मविश्वास ने सबका ध्यान खींचा, जिसे मिला भरपूर प्रोत्साहन।

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। “दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि समाज के उस हर कोने में उजाला भरने का अवसर है जहां अपनों की छांव धुंधली पड़ जाती है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस दीपावली लीक से हटकर एक ऐसी मानवीय मिसाल पेश की, जिसने सलाखों के पीछे और अपनों से दूर रह रहे मासूमों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी। खम्हारडीह बालिका गृह और महिला जेल में बच्चों के बीच पहुंचकर उन्होंने साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, हर बच्चे के बचपन और उसके सपनों पर अधिकार सबका समान है।”

सपनों की कोई सीमा नहीं: परिस्थितियां नहीं, हौसले तय करते हैं भविष्य

दीपावली की चमक-धमक से दूर, जहाँ उम्मीदों और अपनत्व की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, बाल आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने वहाँ पहुंचकर दीपोत्सव के असली मायने को चरितार्थ किया। इस दौरान उन्होंने महिला जेल में बंद महिला बंदियों से आत्मीय संवाद किया और उनके बच्चों की परवरिश, शिक्षा तथा उज्ज्वल भविष्य को लेकर गंभीर चर्चा की।

डॉ. शर्मा ने बच्चों के बीच बैठकर उनकी पढ़ाई, रुचियों और आकांक्षाओं को जाना। बच्चों को ढांढस बंधाते हुए उन्होंने कहा—

“जीवन की परिस्थितियां कभी भी किसी के सपनों की सीमा तय नहीं कर सकतीं। हर बच्चे को एक सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल बचपन पाने का पूरा अधिकार है।”

उन्होंने महिला बंदियों को भी प्रेरित किया कि वे अपने बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लें और यह सुनिश्चित करें कि बच्चों पर उनकी परिस्थितियों का कोई नकारात्मक बोझ न पड़े।

नन्हे हाथों का हुनर और ‘खुशी’ की अनूठी प्रस्तुति ने जीता सबका दिल

कार्यक्रम के दौरान सबसे भावुक और मनमोहक पल तब आया, जब बालिका गृह की बच्चियों ने अपने कोमल हाथों से तैयार किए गए सुंदर दीये और विभिन्न हस्तनिर्मित कलाकृतियां डॉ. वर्णिका शर्मा को भेंट कीं। इन दीयों में केवल मिट्टी और रंगों का मेल नहीं था, बल्कि बच्चियों की मेहनत, उनकी कल्पनाशीलता और स्नेह की भावनाएं जुड़ी हुई थीं। अध्यक्ष ने इन उपहारों को सहर्ष स्वीकार कर बच्चियों की कला की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

इसके साथ ही, ‘खुशी’ नामक एक बच्ची ने अपनी शानदार प्रतिभा का प्रदर्शन कर सबका दिल जीत लिया। उसके गजब के आत्मविश्वास और हुनर को देखकर डॉ. शर्मा ने उसकी सराहना की और उसे जीवन में और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस छोटी सी प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि थोड़े से प्रोत्साहन और विश्वास से हर बच्चे के भीतर छिपा आसमान छुआ जा सकता है।

स्नेह, सुरक्षा और सम्मान: बेहतर भविष्य की मजबूत नींव

कार्यक्रम के अंत में डॉ. वर्णिका शर्मा ने समाज के नाम संदेश देते हुए कहा कि बच्चों को स्नेह, सुरक्षा, सम्मान और प्रोत्साहन मिलना ही उनके बेहतर भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। इस अनूठी पहल ने यह संदेश दिया कि संवेदना के दो बोल और थोड़ा सा अपनापन किसी के भी जीवन में नई रोशनी भर सकता है, और यही सच्ची दीपावली का असली उत्सव है।

About The Author

Share this post:

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

खबरें और भी हैं...

Advertisement Box

RO No. 13820/1

लाइव क्रिकट स्कोर

Gold and Silver price

मौसम अपडेट

राशिफल

© 2026 Nayi Pahal News  – All rights reserved. | News Website Development Services | New Traffic tail