ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से रबी सीजन 2026 में किसानों को मिलेगी राहत; चैनपुर समिति व राधिका एग्रो एजेंसी से हुई पारदर्शी वितरण की शुरुआत
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर : जिले के किसानों को अब खाद-उर्वरक के लिए सोसाइटियों और दुकानों के बाहर घंटों कतारों में नहीं खड़ा होना पड़ेगा। केंद्र सरकार द्वारा विकसित ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ (FFS) सॉफ्टवेयर के माध्यम से जिले में डिजिटल टोकन व्यवस्था की शुरुआत कर दी गई है। रबी 2026 सीजन से जिले की सभी प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों और निजी उर्वरक दुकानों से केवल टोकन के जरिए ही खाद का पारदर्शी और व्यवस्थित वितरण किया जाएगा।

चैनपुर समिति और राधिका एग्रो एजेंसी से हुई शुरुआत
कृषि विभाग की देखरेख में मनेन्द्रगढ़ विकासखंड की आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, चैनपुर और निजी खाद विक्रेता राधिका एग्रो एजेंसी पर पंजीकृत किसानों को FFS के जरिए टोकन जारी कर यूरिया, डीएपी (DAP) और सुपर फास्फेट का सुगम वितरण कराया गया।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कृषि विभाग के उच्च अधिकारी—उप संचालक कृषि इन्दासन सिंह पैकरा, सहायक संचालक कृषि जयंत पैकरा, जिला स्तरीय उर्वरक निरीक्षक एवं नोडल अधिकारी महेश पैकरा तथा शाखा प्रभारी दीपक कुमार साहू मौके पर मौजूद रहे। विभाग द्वारा लगातार समिति प्रबंधकों, दुकानदारों और किसानों को इस डिजिटल प्रणाली का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

डिजिटल क्रांति का प्रत्यक्ष लाभ: कृषक दिनेश साहू को मिला पहला लाभ
जिले में FFS प्रणाली की सफलता का प्रत्यक्ष उदाहरण विकासखंड मनेंद्रगढ़ के ग्राम भलौर निवासी कृषक श्री दिनेश साहू बने। उन्होंने FFS ऐप के माध्यम से अपना टोकन जनरेट किया और राधिका एग्रो एजेंसी पहुंचकर बिना किसी परेशानी या कतार के 02 बोरी यूरिया प्राप्त की।
किसान ऐसे उठाएं FFS ऐप का लाभ
कृषि विभाग ने जिले के सभी किसान भाइयों से अपील की है कि वे अपने स्मार्टफोन में FFS (Framework for Fertilizer Sale) ऐप तुरंत डाउनलोड करें:
- घर बैठे बुकिंग: किसान अपने मोबाइल ऐप से घर बैठे ही खाद का टोकन बुक कर सकते हैं।
- QR कोड दिखाकर उठाएं खाद: ऐप में जनरेट हुए टोकन या क्यूआर (QR) कोड को संबंधित सहकारी समिति या निजी विक्रेता को दिखाकर निर्धारित मात्रा में तुरंत खाद प्राप्त करें।
- पारदर्शिता और समय की बचत: इस प्रणाली से कालाबाज़ारी और अनावश्यक भीड़भाड़ पर पूरी तरह रोक लगेगी और किसानों के कीमती समय की बचत होगी।
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