केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा में ‘राजभाषा हिंदी के आधुनिक प्रयोग’ पर हुआ उच्चस्तरीय विमर्श; आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक ने तकनीकी युग में हिंदी के नए आयाम रेखांकित किए
नई पहल न्यूज नेटवर्क। भोपाल / आगरा। राजभाषा हिंदी अब केवल सरकारी फाइलों, राजपत्रों और प्रशासनिक पत्राचार तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उसे डिजिटल भारत के संपूर्ण डिजिटल जीवन की मुख्य भाषा बनाना समय की मांग है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ई-कॉमर्स, डिजिटल मीडिया और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के इस दौर में हिंदी का दायरा तेजी से विस्तृत हो रहा है। यह बात भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कही।
प्रो. द्विवेदी केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा द्वारा आयोजित ‘राजभाषा हिंदी के आधुनिक प्रयोग’ विषयक विशेष विमर्श में अपना अध्यक्षीय वक्तव्य दे रहे थे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हिंदी के लिए एक स्वर्णिम अवसर
अपने संबोधन में प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग का दौर हिंदी भाषा के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है।
”मशीन अनुवाद, वॉइस टेक्नोलॉजी, स्पीच-टू-टेक्स्ट और जनरेटिव एआई में हिंदी की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर डिजिटल कॉर्पस, आधुनिक शब्दकोश और भाषा-संसाधनों का विकास अत्यंत आवश्यक है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक हिंदी में अब कठिन और बोझिल शब्दावली के बजाय सरलता, स्पष्टता और व्यवहारिकता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ई-गवर्नेंस में सरल हिंदी से नागरिक-केंद्रित होगा शासन
प्रो. द्विवेदी के अनुसार:
- नागरिक-केंद्रित शासन: ई-गवर्नेंस के इस युग में सरकारी पोर्टल्स, मोबाइल ऐप और ऑनलाइन सुविधाओं में सीधी व सरल हिंदी का प्रयोग आम जनता को सरकार से जोड़ेगा।
- मीडिया व तकनीक का संगम: विज्ञान, तकनीक और उच्च शिक्षा के साथ-साथ डिजिटल पत्रकारिता, सोशल मीडिया, पॉडकास्ट और कंटेंट क्रिएशन में हिंदी की संभावनाओं का व्यापक विस्तार करना होगा।
- भारतीय भाषाओं का सेतु: हिंदी को अन्य सभी भारतीय भाषाओं के बीच संवाद, समन्वय और ज्ञान-विनिमय का सशक्त माध्यम (सेतु) बनना होगा।
विद्वानों व शोधार्थियों का जुटा संगम
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. पूरन चंद टंडन रहे। इस अवसर पर संस्थान के परियोजना विभाग के अध्यक्ष प्रो. धनजी प्रसाद की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का कुशल संचालन केशरीनंदन ने किया।
सत्र के दौरान शोध और आधुनिक प्रयोगों पर केंद्रित शोध-पत्र भी प्रस्तुत किए गए, जिनमें प्रमुख रूप से:
- डा. चंद्रलेखा पुरोहित
- डा. मेनका चौधरी
- डा. कुसुमलता पुरोहित
- डा. एस. सुभा
- निवेदिता सिंह
कार्यक्रम के समापन पर सभी वक्ताओं ने एक स्वर में माना कि हिंदी का उज्ज्वल भविष्य केवल पारंपरिक सरकारी कामकाज से नहीं, बल्कि नई तकनीक, आधुनिक ज्ञान और डिजिटल स्पेस में उसकी मजबूत उपस्थिति से तय होगा।
About The Author










































