नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़। दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल मनेन्द्रगढ़ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व अत्यंत हर्षोल्लास, भक्तिभाव और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। नन्हे-मुन्ने बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों, कर्णप्रिय भजनों और भावपूर्ण नृत्यों से पूरा विद्यालय परिसर ‘कृष्णमय’ हो उठा। भक्ति, सृजनात्मकता और बाल-प्रतिभा के इस अनूठे संगम ने कार्यक्रम में मौजूद हर व्यक्ति को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह का शुभारंभ: दीप प्रज्वलन और गायत्री मंत्र से गूँजा परिसर
कार्यक्रम का औपचारिक आगाज प्रातःकालीन प्रार्थना एवं गायत्री मंत्र के पवित्र उच्चारण के साथ हुआ। तत्पश्चात विद्यालय प्रबंधन द्वारा दीप प्रज्वलित कर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की गई। प्री-प्राइमरी वर्ग के छोटे-छोटे बच्चे राधा और कृष्ण की सजीव वेशभूषा में सज-धजकर पहुंचे, जो सभी के आकर्षण का केंद्र रहे।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: नन्हे कलाकारों की कला और अभिनय का जादू
विद्यालय के विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन किया:
- पीकॉक फेदर क्राफ्ट: नर्सरी के मासूम बच्चों ने अपनी रचनात्मकता से सुंदर मोरपंख क्राफ्ट तैयार किया।
- नृत्य व लघु नाटिका: KG-1 के बच्चों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की तालियां बटोरीं, वहीं KG-1 और KG-2 के नन्हे कलाकारों ने एक सुंदर लघु नाटिका के माध्यम से जीवन मूल्यों का संदेश दिया।
- भजन व वक्तव्य: सातवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने ‘गोविंद बोलो, हरि गोपाल बोलो’ भजन से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसी कक्षा की छात्रा तन्वी ने जन्माष्टमी के आध्यात्मिक महत्व पर विचार रखे, जबकि कक्षा दसवीं की सान्वी अग्रहरी ने भावपूर्ण कविता पाठ किया।
- ऊर्जावान नृत्य प्रस्तुति: कक्षा 5वीं (E), 9वीं और 11वीं की छात्राओं ने ऊर्जा से भरपूर लोक व भक्ति नृत्यों की शानदार प्रस्तुति दी।
कर्म और कर्तव्य ही श्रीकृष्ण का सच्चा संदेश: प्रधानाचार्य
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य अश्वनी वर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें कर्तव्यनिष्ठा, सत्य, धैर्य, विवेक और निष्काम कर्म की प्रेरणा देता है। उन्होंने बच्चों से जीवन में प्रेम, करुणा और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
भारतीय पर्व हमारी संस्कृति की जीवंत धरोहर: निदेशिका
विद्यालय की निदेशिका पूनम सिंह ने जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि त्योहार नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं। श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, साहस, ज्ञान और कुशल नेतृत्व का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने बच्चों के चेहरे की मुस्कान और उत्साह को इस सफल आयोजन की असली पूंजी बताया।
कुशल मंच संचालन और यादगार समापन
कार्यक्रम का मंच संचालन कक्षा दसवीं के मेधावी छात्र आद्विक आचार्य एवं शैली जायसवाल ने अत्यंत कुशलतापूर्वक किया। भक्ति, बाल-मन की निश्छलता और भारतीय परंपरा का यह संगम सभी के दिलों में एक अमिट और यादगार छाप छोड़ गया।
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