नियम ताक पर, जानकारी के बदले चालान का ‘अड़ंगा’; परेशान आवेदक ने अब कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़ । शासन-प्रशासन में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए बनाया गया सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) 2005, नवीन जिले के खनिज विभाग में दम तोड़ता नजर आ रहा है। यहाँ के ‘बाबू राज’ ने कानून को अपनी मर्जी के हिसाब से चलाना शुरू कर दिया है, जिससे आवेदक न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं, बल्कि उन्हें आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला ?
मिली जानकारी के अनुसार, आवेदक सुरजीत सिंह ने जिला खनिज विभाग में जनहित से जुड़ी जानकारी के लिए एक आवेदन लगाया था। कानूनन जानकारी देने के बदले विभाग ने 8 रुपये का शुल्क निर्धारित किया। लेकिन, असली विवाद तब शुरू हुआ जब विभाग ने इस मामूली राशि को नकद लेने से साफ इनकार कर दिया और आवेदक पर केवल ‘चालान’ के माध्यम से पैसे जमा करने का दबाव बनाया।
नियमों की सरेआम अनदेखी
उल्लेखनीय है कि RTI अधिनियम के तहत शुल्क जमा करने के लिए आवेदक के पास कई विकल्प होते हैं:
- नकद भुगतान (Cash)
- पोस्टल ऑर्डर (IPO)
- बैंक ड्राफ्ट या चालान
इन स्पष्ट नियमों के बावजूद खनिज विभाग के अधिकारी आवेदक को चालान के लिए भटकने पर मजबूर कर रहे हैं। 8 रुपये के लिए बैंक के चक्कर लगवाना न केवल नियम विरुद्ध है, बल्कि सूचना के अधिकार को दबाने की एक सोची-समझी साजिश भी नजर आती है।
“सूचना के अधिकार का मुख्य उद्देश्य ही प्रशासन को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना है। यदि विभाग मामूली राशि के लिए चालान की जिद करता है, तो यह स्पष्ट रूप से जानकारी छिपाने और आवेदक को हतोत्साहित करने का प्रयास है।”
कलेक्टर की चौखट पर न्याय की उम्मीद
खनिज विभाग की इस मनमानी और ‘फरमान’ से तंग आकर आवेदक सुरजीत सिंह ने अब जिला कलेक्टर से लिखित शिकायत की है। उन्होंने विभाग के संबंधित अधिकारियों पर उचित कार्यवाही करने और सूचना के अधिकार को सुलभ बनाने की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि क्या कलेक्टर खनिज विभाग की इस ‘मनमानी’ पर लगाम कसते हैं, या फिर पारदर्शी प्रशासन का दावा केवल कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगा?
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