मात्र 26 दिनों की तैयारी और कद्दावर चेहरों को शिकस्त, रेणुका सिंह ने बदली छत्तीसगढ़ की सियासत की इबारत
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। छत्तीसगढ़ की राजनीति में जब भी साहस, संगठन क्षमता और जमीनी पकड़ की बात होती है, तो रेणुका सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। आज उनका जन्मदिन है। यह दिन न केवल एक राजनेता का जन्मोत्सव है, बल्कि उस संघर्ष की कहानी का जश्न है जिसने एक साधारण मंडल अध्यक्ष को देश की संसद और छत्तीसगढ़ विधानसभा की दहलीज तक पहुँचाया।

पंचायत से संसद तक: एक असाधारण सफर
रेणुका सिंह उन चुनिंदा नेताओं में शुमार हैं जिन्होंने सत्ता के शिखर को पंचायत स्तर से चखा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भाजपा के एक समर्पित मंडल अध्यक्ष के रूप में की। इसके बाद त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में जीत हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया कि उनकी पकड़ जनता की नब्ज पर कितनी गहरी है। दस्तावेज़ बताते हैं कि 5 जनवरी 1964 को जन्मी रेणुका सिंह ने अपने राजनीतिक कौशल के दम पर न केवल विधानसभा (2003, 2008 और 2023), बल्कि लोकसभा (2019) में भी प्रतिनिधित्व किया। वे उन विरल नेताओं में से हैं जिन्होंने केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों में मंत्री के रूप में अपनी प्रशासनिक कुशलता का परिचय दिया है।
विरासत का शंखनाद: माँ के पदचिन्हों पर बेटी अधिवक्ता मोनिका सिंह
रेणुका सिंह की राजनीतिक विरासत अब अगली पीढ़ी के हाथों में सुरक्षित नजर आ रही है। रेणुका सिंह, जिनके दो बेटे और दो बेटियां हैं, की राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर उनकी सुपुत्री अधिवक्ता मोनिका सिंह उभरकर सामने आई हैं। साल 2025 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में मोनिका सिंह ने न केवल सक्रिय राजनीति में पदार्पण किया, बल्कि एक ऐसी जीत दर्ज की जिसने इतिहास को दोहरा दिया। उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री स्व. तुलेश्वर सिंह के पुत्र को करारी शिकस्त दी। यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि वर्षों पहले खुद रेणुका सिंह ने भी स्व. तुलेश्वर सिंह को पराजित कर पहली बार विधानसभा की दहलीज लांघी थी। माँ के बाद अब बेटी ने उसी परिवार के राजनीतिक वारिस को हराकर यह साबित कर दिया है कि क्षेत्र की जनता का भरोसा आज भी इस परिवार के साथ अडिग है। मोनिका सिंह की यह शुरुआती जीत उन्हें छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक उभरते हुए सशक्त चेहरे के रूप में स्थापित करती है।


भरतपुर-सोनहत की वह ‘ऐतिहासिक’ जीत
साल 2023 का विधानसभा चुनाव उनके करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण लेकिन सफल अध्यायों में से एक रहा। पार्टी ने उन्हें नए चुनावी क्षेत्र भरतपुर-सोनहत से मैदान में उतारा। सामने कांग्रेस के कद्दावर नेता गुलाब कमरो थे। चुनौती बड़ी थी और समय बहुत कम, लेकिन रेणुका सिंह ने मात्र 26 दिनों के धुआंधार प्रचार में समीकरण बदल दिए और एक शानदार जीत दर्ज कर विरोधियों को चौंका दिया।
संसदीय और सामाजिक योगदान की लंबी फेहरिस्त
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनका कार्यकाल उपलब्धियों से भरा रहा है:
- राज्य सरकार में भूमिका: महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग की स्वतंत्र प्रभार मंत्री रहीं।
- केंद्र सरकार में भूमिका: जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार में राज्य मंत्री के रूप में देश भर के आदिवासियों के उत्थान के लिए काम किया।
- संसदीय समितियां: वर्तमान में (2024) वे छत्तीसगढ़ विधानसभा की ‘महिला एवं बालकों के कल्याण संबंधी समिति’ की सभापति के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
सादगी और अनुभव का संगम
हायर सेकेंडरी तक शिक्षित और कृषि पृष्ठभूमि से आने वाली रेणुका सिंह की पहचान एक स्पष्टवादी और जुझारू नेता की है। विदेशी दौरों (ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, नेपाल) के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय अनुभव और वर्षों के संसदीय ज्ञान ने उन्हें एक परिपक्व राजनेता बनाया है।
आज उनके जन्मदिन पर, भरतपुर-सोनहत की जनता और प्रदेश भर के कार्यकर्ता उनकी लंबी उम्र और उज्जवल भविष्य की कामना कर रहे हैं।
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