पुलिस की मुस्तैदी और संवेदनशीलता ने टाला बड़ा हादसा; अपनों को सही-सलामत पाकर छलके परिजनों के आंसू, क्षेत्र में सराहना
नई पहल न्यूज नेटवर्क। चिरमिरी। कहते हैं कि ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय’ और जब रक्षक खुद आधी रात को देवदूत बनकर सामने आ जाए, तो मासूमों पर आंच आना नामुमकिन है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है चिरमिरी पुलिस ने। पुलिस की सतर्कता, त्वरित सूझबूझ और संवेदनशीलता के कारण रेलवे स्टेशन पर देर रात भटक रहे दो सगे मासूम भाइयों को चंद घंटों के भीतर सुरक्षित उनके परिवार से मिला दिया गया। अगर पुलिस की नजर समय रहते इन बच्चों पर न पड़ती, तो कोई भी अनहोनी हो सकती थी। पुलिस की इस मानवीय पहल की पूरे क्षेत्र में जमकर तारीफ हो रही है।
आधी रात को स्टेशन पर अकेले थे 7 और 5 साल के मासूम
थाना प्रभारी विजय सिंह ने बताया कि बीती रात लगभग 1 बजे पुलिस टीम रूटीन गश्त पर थी। इसी दौरान सूचना मिली कि रेलवे स्टेशन परिसर में दो छोटे बच्चे बेहद डरे-सहमे अकेले घूम रहे हैं। रात के सन्नाटे में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस टीम ने बिना एक पल गंवाए तत्काल मौके पर दबिश दी। पुलिस ने दोनों बच्चों को अपनी सुरक्षा में लिया और दुलारते हुए उन्हें थाने लेकर आई, जहाँ उन्हें भोजन और पानी दिया गया।
कम उम्र बनी रुकावट, पर पुलिस ने नहीं मानी हार
थाने लाकर जब बच्चों से प्यार से पूछताछ की गई, तो उन्होंने अपना नाम मुखी (7 वर्ष) और अंशु (5 वर्ष) बताया। उम्र बहुत कम होने के कारण मासूम बच्चे डरे हुए थे और अपने घर का पता या परिजनों का मोबाइल नंबर बताने में असमर्थ थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चिरमिरी पुलिस ने तत्काल एक विशेष रणनीति बनाई:
- आसपास के सभी थानों के सोशल मीडिया ग्रुप्स में बच्चों की तस्वीरें साझा की गईं।
- स्थानीय स्तर पर गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाली गई।
- आखिरकार, सुबह ‘पोड़ी थाने’ से एक इनपुट मिला कि ये बच्चे कोटा डोल निवासी प्रकाश के बेटे हैं, जो रात से लापता थे।
दादा की आँखों में आए ख़ुशी के आँसू, पुलिस को दिया धन्यवाद
जैसे ही परिजनों का सुराग मिला, पुलिस ने बच्चों के दादा लाख राम को थाने बुलाया। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं और पहचान की पुष्टि करने के बाद, दोनों मासूमों को सुरक्षित उनके दादा के सुपुर्द कर दिया गया। अपने लाडलों को सही-सलामत सामने देखकर दादा की आँखों से ख़ुशी के आँसू छलक पड़े। उन्होंने पुलिस टीम का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया।
अगर देर हो जाती तो हो सकता था बड़ा अनहोनी का शिकार
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि चिरमिरी पुलिस समय रहते एक्शन में नहीं आती, तो बच्चे किसी भी ट्रेन में बैठकर दूसरे शहर निकल जाते। रात के वक्त उनके साथ किसी अप्रिय घटना या मानव तस्करी जैसे अपराध की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। पुलिस की मुस्तैदी ने दो पिताओं का कुल दीपक बुझने से बचा लिया।
थाना प्रभारी की जनता से अपील:
छोटे बच्चों पर विशेष निगरानी रखें। उन्हें कभी भी अकेला न छोड़ें। यदि आपको कहीं भी कोई संदिग्ध, लावारिस या भटकता हुआ बच्चा दिखाई दे, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। आपकी एक सतर्कता किसी मासूम की जिंदगी बचा सकती है।
— विजय सिंह, थाना प्रभारी, चिरमिरी
चिरमिरी पुलिस की इस त्वरित और सराहनीय कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि खाकी सिर्फ कानून व्यवस्था ही नहीं संभालती, बल्कि जब बात मानवीय संवेदनाओं की आती है, तो वह पूरी शिद्दत के साथ जनता के रक्षक की भूमिका निभाती है।
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