धान खरीदी की मियाद बढ़ाने और 21 क्विंटल प्रति एकड़ की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन; मनरेगा को लेकर भी सरकार को घेरा
नई पहल न्यूज नेटवर्क। केल्हारी। छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले किसानों और मजदूरों के अधिकारों को लेकर आज केल्हारी की धरती पर कांग्रेस ने हुंकार भरी। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेन्द्रगढ़ ग्रामीण के नेतृत्व में आयोजित एक दिवसीय विशाल धरना प्रदर्शन में सरकार की ‘किसान विरोधी’ नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
बापू की राह पर सत्य और अधिकार की लड़ाई
आंदोलन का आगाज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया। कांग्रेस नेताओं ने बापू के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए संकल्प लिया कि वे सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर किसानों और गरीबों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे।

किसानों की तीन प्रमुख मांगें: समय, सीमा और टोकन
धरना स्थल पर उमड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने धान खरीदी की वर्तमान व्यवस्था पर कड़े प्रहार किए। कांग्रेस ने प्रमुख रूप से तीन मांगें बुलंद की हैं:
- समय-सीमा में वृद्धि: धान खरीदी की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जाए ताकि शेष बचे किसान अपनी उपज बेच सकें।
- 21 क्विंटल की गारंटी: प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की पूर्ण खरीदी सुनिश्चित की जाए।
- लंबित टोकन का समाधान: जिन किसानों को अब तक टोकन नहीं मिला है, उन्हें तत्काल टोकन जारी किए जाएं।
मनरेगा: गरीबों की जीवनरेखा पर संकट
ब्लॉक अध्यक्ष रामनरेश पटेल और पूर्व जनपद अध्यक्ष डॉ. विनय शंकर सिंह ने मनरेगा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस ऐतिहासिक योजना को कमजोर कर रही हैं। मजदूरी भुगतान में देरी और काम के अवसरों में कटौती से ग्रामीण परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
भाजपा सरकार चुनाव के वादे भूलकर अब किसानों को दफ्तरों के चक्कर कटवा रही है। छत्तीसगढ़ का किसान अपनी ही उपज बेचने के लिए मोहताज है, जिसे कांग्रेस कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
– रामनरेश पटेल, ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष
नारों से गूंजा केल्हारी
प्रदर्शन के दौरान “टोकन दो-धान लो” और “किसान विरोधी सरकार नहीं चलेगी” जैसे नारों से माहौल पूरी तरह चुनावी और आंदोलित नजर आया। पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष राजेश साहू ने स्पष्ट किया कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यह आंदोलन जिला मुख्यालय तक फैलेगा।
इन नेताओं की रही सक्रिय सहभागिता
आंदोलन में मुख्य रूप से मकसूद आलम, उपेन्द्र द्विवेदी, संदीप द्विवेदी, अमोल सिंह, रफीक मेमन, राजकुमार पूरी, जितेंद्र मिश्रा सहित भारी संख्या में किसान, मजदूर और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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