‘चाटुकारिता और फूलछाप कांग्रेसियों’ को संरक्षण देने का आरोप, MCB जिले में कांग्रेस के आखिरी किले पर भी मंडराया खतरा
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर| MCB की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब जिला कांग्रेस कमेटी के सचिव और दिग्गज नेता रामा यादव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जिला अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव को भेजे गए अपने तल्ख इस्तीफे में रामा यादव ने न केवल नेतृत्व की कमजोरी पर सवाल उठाए हैं, बल्कि पार्टी के भीतर पनप रही ‘चाटुकारिता’ और ‘दोगली राजनीति’ पर भी तीखा प्रहार किया है।
वफादारी पर चोट और अस्तित्व की लड़ाई
वर्ष 2002 से छात्र राजनीति के जरिए कांग्रेस की विचारधारा को सींचने वाले रामा यादव, जिन्होंने भारत जोड़ो यात्रा से लेकर जेल तक का सफर पार्टी के लिए तय किया, आज खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका यह इस्तीफा केवल एक पद का त्याग नहीं है, बल्कि उस कार्यशैली के खिलाफ विद्रोह है जहाँ निष्ठावान कार्यकर्ताओं के बजाय ‘निजी मोह’ और ‘चापलूसी’ को तरजीह दी जा रही है।
बड़ा राजनैतिक खतरा: भाजपा की झोली में जा सकती है एक और नगर पंचायत
इस इस्तीफे के साथ ही कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि रामा यादव की पत्नी ललिता रामा यादव वर्तमान में खोंगापानी नगर पंचायत की अध्यक्ष हैं। राजनैतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि यदि रामा यादव का मोहभंग पूरी तरह पार्टी से हुआ, तो खोंगापानी नगर पंचायत भी कांग्रेस के हाथ से निकल सकती है। यदि ऐसा होता है, तो MCB जिले के सभी नगरीय निकायों में भारतीय जनता पार्टी का एकछत्र राज हो जाएगा और कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो जाएगा।

इस्तीफे के बड़े और कड़े बोल:
रामा यादव ने अपने पत्र में बेबाकी से कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
- कमजोर नेतृत्व: उन्होंने जिला अध्यक्ष को सीधे तौर पर ‘कमजोर’ बताया जो मजबूत फैसले लेने में सक्षम नहीं हैं।
- फूलछाप कांग्रेसी: उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के बड़े नेता उन लोगों को संरक्षण दे रहे हैं जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं।
- अपमान का दर्द: जिला यादव समाज के अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने 17,000 यादव मतदाताओं की ताकत का हवाला देते हुए कहा कि उनका बार-बार अपमान अब असहनीय हो गया है।
- स्वतंत्र निर्णय: उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वे स्वतंत्र रूप से जनता और अपने हितों में फैसले लेंगे।
महंत और कमरो का जिक्र, राजनीति के नए संकेत
रामा यादव ने अपने पत्र में डॉ. चरणदास महंत को अपना सर्वमान्य नेता बताया है, वहीं इस्तीफे की प्रतिलिपि पूर्व विधायक गुलाब कमरो को भी भेजी है। यह इशारा करता है कि नाराजगी स्थानीय संगठन और कुछ खास चेहरों से है, जो चाटुकारिता को बढ़ावा दे रहे हैं।
आगे क्या
रामा यादव का यह ‘प्रत्याघात’ जिले की राजनीति में कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकता है। क्या संगठन उन्हें मनाने में सफल होगा, या फिर एक निष्ठावान सिपाही के जाने से कांग्रेस अपने आखिरी गढ़ को भी गंवा देगी? यह आने वाला समय बताएगा।
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