बंगाली बस्ती में अचानक फटा गैस मीटर; बिना सेफ्टी ट्रायल सप्लाई शुरू करने का आरोप, जिम्मेदारी से भाग रहे अधिकारी
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़। शहर के रिहायशी इलाके में घरेलू गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट की सुरक्षा और उसकी कार्यप्रणाली पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। वार्ड क्रमांक 08, बंगाली बस्ती में राकेश कुमार सिंह के निवास पर स्थापित गैस मीटर में शाम लगभग 7 बजे अचानक एक तीव्र ब्लास्ट हो गया। गनीमत रही कि हादसे के वक्त वहां मौजूद युवक इसकी सीधी चपेट में आने से बच गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। लेकिन इस तकनीकी विफलता ने पूरे वार्ड के निवासियों की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया है।
अंधेरे में रखे गए उपभोक्ता: सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित राकेश कुमार सिंह के घर पर कुछ महीने पहले ही इस गैस पाइपलाइन का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया था। इस हादसे ने कंपनी की पूरी कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है:
- नो-ऑब्जेक्शन और नो-इन्फर्मेशन: परिजनों का आरोप है कि कंपनी ने पाइपलाइन में लाइव गैस की टेस्टिंग या सप्लाई शुरू करने से पहले उपभोक्ताओं को किसी भी माध्यम से सूचित नहीं किया था।
- सुरक्षा मानकों की अनदेखी: बिना किसी पूर्व चेकिंग या उपभोक्ता की मौजूदगी के सीधे गैस चार्ज कर देना तकनीकी रूप से एक गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है।
जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते अधिकारी: ‘कमीशनिंग’ के बाद गड्ढे बने मुसीबत
हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन का जो रवैया सामने आया है, वह और भी अधिक चिंताजनक है। राकेश सिंह ने बताया कि उनके घर के ठीक सामने मुख्य मार्ग पर कंपनी ने काम के दौरान एक गहरा गड्ढा खोद दिया था।
हमने बार-बार अधिकारियों से इस गड्ढे को री-फिल (भरने) करने का आग्रह किया, क्योंकि यह रोजमर्रा के आवागमन में बाधक और खतरनाक है। लेकिन अधिकारियों का दो टूक जवाब था कि— ‘हमारा काम खत्म हो चुका है, हमने नगर पालिका को फंड ट्रांसफर कर दिया है, अब यह उनकी सिरदर्दी है।’
— राकेश सिंह, गृहस्वामी
हद तो तब हो गई जब घटना की सूचना मिलने के बाद अगली सुबह अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन स्थिति का ठोस निवारण करने के बजाय महज कुछ मिनटों की खानापूर्ति कर वहां से रवाना हो गए।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग: सुरक्षा ऑडिट के बिना न चले सप्लाई
इस घटना के बाद से बंगाली बस्ती के नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। मोहल्लेवासियों का कहना है कि आज यह हादसा एक घर में हुआ है, कल को यह पूरी अंडरग्राउंड लाइन में भी हो सकता है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से की ये तीखी मांगें:
- क्रिमिनल नेग्लिजेंस की जांच: इस पूरे मामले को ‘आपराधिक लापरवाही’ मानते हुए प्रशासन दोषी वेंडर्स और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए।
- थर्ड-पार्टी सुरक्षा ऑडिट: जब तक क्षेत्र की पूरी पाइपलाइन का किसी स्वतंत्र एजेंसी से ‘सेफ्टी ऑडिट’ नहीं करा लिया जाता, तब तक आगे की सप्लाई पर रोक लगे।
- जवाबदेही का निर्धारण: खोदे गए गड्ढों के कारण यदि कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी सीधी जवाबदेही गैस कंपनी की तय की जाए।
यह घटना मनेन्द्रगढ़ प्रशासन के लिए एक वेक-अप कॉल (चेतावनी) है कि वे विकास के नाम पर आम नागरिकों की जिंदगी से खिलवाड़ न होने दें।
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