मुख्यमंत्री के आने से पहले अपनों ने ही घेरा; एसडीएम पर सीधे मना करने का आरोप, हेलीपैड और विश्राम गृह में एंट्री न मिलने से भारी आक्रोश
नई पहल न्यूज नेटवर्क। कोरिया|छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कोरिया दौरे से पहले जिला प्रशासन के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जिला पंचायत सदस्य सौभाग्यवती सिंह के कड़े रुख के बाद अब राजेश साहू (सभापति, वन समिति, जिला पंचायत कोरिया) ने भी सोशल मीडिया पर अपनी व्यथा साझा करते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजेश साहू का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने की अनुमति देने से साफ़ इनकार कर दिया है।
राजेश साहू का छलका दर्द : “हम अपनी समस्याएं लेकर कहां जाएं ?
राजेश साहू ने फेसबुक पर एक भावुक और तल्ख पोस्ट साझा की है। उन्होंने प्रशासन पर “इतना बड़ा दबाव” होने की बात कही है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को अपने ही क्षेत्र की समस्याओं के लिए मुख्यमंत्री से मिलने का समय नहीं दिया जा रहा है।
- एसडीएम पर आरोप: राजेश साहू के अनुसार, वे मुख्यमंत्री से मिलने की अनुमति मांगने के लिए एसडीएम के पास गए थे, लेकिन उन्होंने स्पष्ट तौर पर मना कर दिया।
- हर जगह ‘नो एंट्री’: उन्होंने बताया कि न तो हेलीपैड, न विश्राम गृह और न ही कार्यक्रम स्थल के लिए उन्हें किसी भी प्रकार की अनुमति (परमिशन) मिली है।
- लोकतंत्र पर सवाल: साहू ने निराशा व्यक्त करते हुए लिखा कि क्या “लोकतंत्र से बड़ा प्रशासन तंत्र हो गया है?”
प्रशासन के ‘डैमेज कंट्रोल’ पर फिरा पानी ?
एक ओर जहाँ खबर आ रही थी कि प्रशासन ने सौभाग्यवती सिंह के घर जाकर उन्हें पास सौंप दिया है, वहीं राजेश साहू जैसे सक्रिय जनप्रतिनिधि का यह आरोप सरकार और प्रशासन की छवि के लिए एक बड़ा झटका है। यह विवाद अब व्यक्तिगत न रहकर निर्वाचित प्रतिनिधियों के सामूहिक सम्मान की लड़ाई बनता जा रहा है।
चर्चा में क्यों है यह पोस्ट ?
- सीधे आरोप: एसडीएम स्तर के अधिकारी पर जनप्रतिनिधि की अनदेखी का गंभीर आरोप।
- अधिकारों का हनन: जनप्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें जनता की समस्याएं रखने से रोका जा रहा है।
- प्रशासनिक तानाशाही: आईडी कार्ड और वाहन पास को लेकर बढ़ता विवाद अब मुख्यमंत्री के दौरे की चमक फीकी कर सकता है।
मुख्यमंत्री की चौखट तक पहुंचेगी गूंज ?
सौभाग्यवती सिंह के बाद राजेश साहू का यह ‘डिजिटल विद्रोह’ स्पष्ट करता है कि कोरिया जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस ‘अपनों’ की नाराजगी पर क्या संज्ञान लेते हैं।
About The Author









































