‘नई पहल’ के सवाल पर मुख्यमंत्री का दिल जीतने वाला जवाब; सरगुजा संभाग की तीन महिला कलेक्टर्स के परफॉर्मेंस की थपथपाई पीठ
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़/रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक सियासत और ब्यूरोक्रेसी के गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी और एक्सक्लूसिव खबर सामने आ रही है। राज्य में सुशासन और विकास की रफ्तार नाप रहे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सूबे की महिला आईएएस अधिकारियों को लेकर एक ऐसा ऐतिहासिक बयान दिया है, जिसने महिला सशक्तिकरण की एक नई परिभाषा लिख दी है।
‘नई पहल’ के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री साय ने साफ शब्दों में कहा कि वे प्रदेश में महिला कलेक्टर्स के काम करने के अंदाज, उनकी संवेदनशीलता और कड़क गवर्नेंस से बेहद खुश हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान केवल एक तारीफ नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक कमान संभाल रही बेटियों के लिए एक बड़ा ‘सर्टिफिकेट’ है।
सरगुजा संभाग में ‘ट्रिपल पावर’: जब तीन महिला कलेक्टर्स ने पेश किया रिपोर्ट कार्ड
दरअसल, यह पूरा मामला मुख्यमंत्री द्वारा ली गई तीन जिलों (सूरजपुर, कोरिया और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) की हाई-लेवल समीक्षा बैठक से जुड़ा है। इस बैठक में जब विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था की समीक्षा हुई, तो तीनों जिलों की महिला कलेक्टर्स के विजन और ग्राउंड रियलिटी को देखकर मुख्यमंत्री कायल हो गए।
इस मैराथन बैठक में ‘ट्रिपल पावर’ के रूप में ये तीन जांबाज महिला अधिकारी मौजूद थीं:
- संतन देवी जांगड़े (कलेक्टर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB)
- रोकतिमा यादव (कलेक्टर, कोरिया)
- रेना जमील (कलेक्टर, सूरजपुर)
ब्यूरोक्रेसी के शिखर पर ‘नारी शक्ति’: आंकड़े दे रहे गवाही
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सिर्फ तारीफ ही नहीं की, बल्कि आंकड़ों के साथ यह साबित किया कि छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक मशीनरी का ‘इंजन’ अब महिलाएं ही दौड़ा रही हैं।
- महिला कलेक्टर्स: पूरे प्रदेश के 10 जिलों में महिला कलेक्टर्स कमान संभाल रही हैं, जिससे मैदानी स्तर पर कड़क और संवेदनशील प्रशासन मिल रहा है।
- महिला प्रमुख सचिव: राज्य शासन के 04 शीर्ष पदों पर महिला अधिकारी तैनात हैं, जो मंत्रालय और नीति निर्धारण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
- सरगुजा संभाग: संभाग के 06 जिलों में से 04 जिलों में महिला कलेक्टर्स तैनात हैं, जो इस पूरे अंचल के विकास की मुख्य धुरी बनी हुई हैं।
साय सरकार का यह बयान क्यों है खास ?
- नारों से आगे बढ़कर काम: अक्सर राजनीतिक मंचों से महिला सशक्तिकरण की बातें होती हैं, लेकिन ग्राउंड जीरो पर छत्तीसगढ़ पहला ऐसा राज्य बनता दिख रहा है जहां 10 महत्वपूर्ण जिलों की चाबी सीधे तौर पर महिला कलेक्टर्स के हाथों में है।
- भ्रष्टाचार और लेटलतीफी पर लगाम: महिला अधिकारियों की कार्यशैली में संवेदनशीलता के साथ-साथ अनुशासन और कड़ाई भी देखी जा रही है, जिससे पेंडिंग फाइलों की संख्या कम हुई है।
- साय सरकार का भरोसा: मुख्यमंत्री के इस खुले समर्थन के बाद अब फील्ड में काम कर रही महिला अफसरों का मनोबल सातवें आसमान पर होगा, जिससे आने वाले दिनों में जनता के काम और तेजी से होंगे।
‘नई पहल’ की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से यह साफ है कि छत्तीसगढ़ में अब ब्यूरोक्रेसी का चेहरा बदल रहा है, और इस बदलाव की कप्तानी खुद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कर रहे हैं।
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