डॉ. वर्णिका शर्मा की दोटूक : रोमांच के नाम पर अनमोल जीवन से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, स्कूल प्रबंधन की होगी जिम्मेदारी
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर|छत्तीसगढ़ के स्कूलों में विदाई समारोह (फेयरवेल) और अन्य आयोजनों के नाम पर जानलेवा स्टंट करने वाले छात्रों और लापरवाह स्कूल प्रबंधन पर अब गाज गिरने वाली है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों के बढ़ते जोखिम भरे कृत्यों को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के सभी कलेक्टरों, जिला शिक्षा अधिकारियों और संचालक लोक शिक्षण को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्पष्ट किया है कि किशोरावस्था का उत्साह अनुशासनहीनता में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने कहा कि “बच्चों का जीवन अनमोल है, इसे चंद सेकंड के रोमांच की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता।”

प्रमुख निर्देश: जो स्कूलों को मानने होंगे
आयोग ने अपनी अनुशंसा में स्पष्ट प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा है:
- बिना सूचना कोई आयोजन नहीं: विदाई समारोह या कोई भी छात्र कार्यक्रम बिना शाला प्रबंधन की पूर्व सूचना और अनुमति के नहीं होगा।
- शिक्षकों की निगरानी अनिवार्य: हर समारोह गरिमामय तरीके से शिक्षकों की प्रत्यक्ष देखरेख में ही संपन्न कराया जाए।
- नोटिस और कार्रवाई: यदि किसी स्कूल के छात्र सड़कों पर या परिसर में जोखिम भरे कृत्य (जैसे- चलती गाड़ी से बाहर निकलना, तेज रफ्तार ड्राइविंग, बाइक स्टंट) करते पाए गए, तो संबंधित शाला प्रमुख को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी होगा।
- पुलिस देगी ‘स्नेहिल’ समझाइश: पुलिस अधिकारी स्वयं स्कूलों में जाकर बच्चों को गंभीरता और स्नेह के साथ इन खतरों के प्रति जागरूक करेंगे।
20 फरवरी तक मांगी गई रिपोर्ट
डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस मामले को लेकर प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने शिक्षा विभाग और सभी कलेक्टर्स को निर्देशित किया है कि इन अनुशंसाओं पर की गई प्रभावी कार्यवाही की लिखित रिपोर्ट 20 फरवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से आयोग को भेजी जाए।
हमें बच्चों के साहसी कार्यों से परहेज नहीं है, लेकिन यह साहस उनकी जान जोखिम में डालकर नहीं आना चाहिए। यदि आज इन कृत्यों को नहीं रोका गया, तो यह भविष्य में एक घातक परंपरा बन जाएगी।
— डॉ. वर्णिका शर्मा, अध्यक्ष, बाल अधिकार संरक्षण आयोग
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