नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़/पामगढ़। छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन तिहार’ को लेकर सियासत पूरी तरह गरमा गई है। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने पामगढ़ से कांग्रेस की महिला विधायक शेषराज हरबंश को कार्यक्रम में जाने से रोके जाने पर राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को आड़े हाथों लिया है। महंत ने बेहद कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि प्रशासनिक अमला जानबूझकर कांग्रेस जनप्रतिनिधियों को रोक रहा है, क्योंकि सरकार को डर है कि कांग्रेस विधायक ऐसे सवाल पूछेंगे जिनका जवाब मुख्यमंत्री के पास भी नहीं होगा। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि भाजपा को जितना सुशासन का ढोंग करना है कर ले, आने वाले दिनों में कांग्रेस ही शासन में वापसी करेगी।
कलेक्टर-एसपी पर बरसे महंत : “सब पता होने के बाद भी विधायक को रोका”
डॉ. चरणदास महंत ने पामगढ़ की महिला विधायक शेषराज हरबंश के साथ हुए बर्ताव पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा:
”मुख्यमंत्री किस जगह उतरेंगे, उनका क्या शेड्यूल है, यह जिले के कलेक्टर और एसपी को बखूबी मालूम होता है। इसके बावजूद जब हमारी महिला विधायक वहां पहुंचती हैं, तो उन्हें रोक दिया जाता है। यह सरासर तानाशाही और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश है।”
“सवालों से डर रही है सरकार”
महंत ने अधिकारियों और सरकार की मंशा पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेसियों को रोकने के पीछे का असली डर उनकी आवाज है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऊपर से निर्देश हैं कि कांग्रेस विधायकों को दूर रखा जाए, ताकि वे जनता के हक के ऐसे तीखे प्रश्न न कर सकें जिनका उत्तर देने में सीएम असहज हो जाएं।
सत्ता परिवर्तन का दावा: “अगली बार हम होंगे शासन में”
चुनावी और सियासी भविष्य को लेकर आश्वस्त नजर आए नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार को सीधी चुनौती दी। महंत ने कहा, “मुख्यमंत्री को जितना ‘सुशासन’ का ढिंढोरा पीटना है, पीटते रहें। जनता सब देख रही है। आज भले ही ये हमें रोक रहे हैं, लेकिन आने वाले दिनों में हम (कांग्रेस) ही शासन में होंगे।”
क्या है पूरा विवाद ?
गौरतलब है कि पामगढ़ में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ कार्यक्रम में शामिल होने जा रही थीं कांग्रेस की स्थानीय महिला विधायक शेषराज हरबंश। आरोप है कि वहां तैनात कलेक्टर और एसपी ने प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए उन्हें कार्यक्रम स्थल पर जाने से रोक दिया। इस घटना के बाद से ही कांग्रेस पूरी तरह हमलावर है और इसे महिला जनप्रतिनिधि के अपमान के साथ-साथ लोकतंत्र की हत्या करार दे रही है।
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