बाल गृहों में नशीले पदार्थ, स्कूलों में गंदगी राज्यभर की गंभीर अनियमितताओं पर आयोग ने 5 दिन में सुधार का आदेश दिया
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग अब एक्शन मोड में आ गया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने आज आयोजित प्रेस वार्ता में स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गलती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रदेशभर के बाल संरक्षण गृहों, स्कूलों और स्वास्थ्य संस्थानों से प्राप्त गंभीर रिपोर्टों की समीक्षा करते हुए सभी संबंधित विभागों को त्वरित और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
आयोग केवल रिपोर्ट नहीं लेगा, बल्कि दोषियों पर कार्रवाई भी सुनिश्चित करेगा
बच्चों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग की यह सख्ती एक बड़े बदलाव का संकेत है। हाल ही में किए गए औचक निरीक्षणों में बाल संप्रेक्षण गृहों में स्वच्छता की कमी, भोजन की गुणवत्ता में गिरावट, सुरक्षा गार्डों की अनुपस्थिति और यहां तक कि परिसर में नशीले पदार्थों की उपलब्धता जैसी गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट कर दिया है कि आयोग केवल रिपोर्ट नहीं लेगा, बल्कि दोषियों पर कार्रवाई भी सुनिश्चित करेगा। कोरबा में मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा बच्चों से मुलाकात के बाद, अब आयोग ने पूरे राज्य की रिपोर्टों पर कड़ी निगरानी रखते हुए, सुधार के लिए पांच दिन की समय-सीमा तय कर दी है।
मुख्य बिंदुओं पर आयोग का कठोर निर्देश:
- बाल गृहों में गंभीर अनियमितताएँ: निरीक्षण रिपोर्टों में अव्यवस्था, बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार, और सुरक्षा की बड़ी कमियां सामने आईं। आयोग ने तत्काल सुधारात्मक कदम और जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया है।
- स्कूलों में असुरक्षित माहौल: कई विद्यालयों में साफ-सफाई की कमी, खेल मैदानों की जर्जर हालत और परिसर के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायतों पर डॉ. शर्मा ने चिंता जताई। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त कार्रवाई करने को कहा गया है।
- स्वास्थ्य सुविधाओं पर पाँच दिन का अल्टीमेटम: कई बाल संस्थानों में चिकित्सा सुविधाओं, दवाओं और मेडिकल स्टाफ की कमी पाई गई। आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करने के लिए पांच दिनों के भीतर सभी कमियों को दूर करने का निर्देश दिया है।
- शोषण मामलों में त्वरित संज्ञान: बाल उत्पीड़न, शोषण और प्रताड़ना के मामलों पर विशेष जोर दिया गया है। आयोग ने सभी जिलों को ऐसे मामलों में तुरंत संज्ञान लेकर बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
आयोग ने बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और देखभाल को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसमें स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और बाल गृहों के कर्मचारियों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण शामिल होगा।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने दोहराया: “आयोग बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध है और बाल संरक्षण में किसी भी प्रकार की चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” आयोग अब नियमित निरीक्षण करेगा और तुरंत आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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