मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में जनजातीय सलाहकार परिषद की बड़ी बैठक, बस्तर और सरगुजा के लिए खुले प्रगति के द्वार
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों और जनजातीय क्षेत्रों में विकास की गति को ‘रॉकेट रफ्तार’ देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हुंकार भरी है। बुधवार को महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद के पीछे हटने के बाद अब शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का स्वर्णिम समय आ गया है। इस दौरान उन्होंने ‘नियत नेल्लानार 2.0’ के जल्द आगाज की घोषणा कर बस्तर और सरगुजा के कायाकल्प का नया रोडमैप पेश किया।
प्रमुख निर्णय: जो बदलेंगे वनांचल की तस्वीर
- नियत नेल्लानार 2.0 का शंखनाद: पहले चरण की सफलता के बाद अब दूसरे चरण में बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी बुनियादी सुविधाओं का और अधिक विस्तार किया जाएगा।
- अतिक्रमण पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: मुख्यमंत्री ने देवगुड़ी और सरना जैसे पवित्र धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अवैध कब्जों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
- जमीन हड़पने वालों की खैर नहीं: जनजातीय भूमि को लंबे समय तक लीज पर लेकर शोषण करने वाले मामलों की जांच के आदेश दिए गए हैं।
- आरक्षण की राह आसान: ‘कोरवा’ और ‘संसारी उरांव’ समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य: ‘ओपन एयर’ क्लास पर रोक
मुख्यमंत्री साय ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब कोई भी क्लास खुले आसमान के नीचे नहीं लगेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि:
- नक्सल मुक्त क्षेत्रों में बच्चों के लिए फास्ट-ट्रैक लर्निंग का माहौल बनाया जाए।
- छात्रावासों की क्षमता बढ़ाई जाए और शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित हो।
- मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर योजना के तहत 36 लाख लोगों की स्क्रीनिंग को और तेज किया जाए।
इन्फ्रास्ट्रक्चर: सुस्त रफ्तार पर सीएम की नाराजगी
अंबिकापुर नेशनल हाईवे के निर्माण में हो रही देरी पर मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा और मानसून से पहले उन सड़कों का काम प्राथमिकता पर पूरा किया जाए, जिनका संपर्क बारिश में टूट जाता है।
केरल से भी बड़े भौगोलिक क्षेत्र वाले बस्तर को दशकों तक विकास से वंचित रखा गया। लेकिन अब समय बदल चुका है। हम न केवल आधारभूत ढांचा मजबूत कर रहे हैं, बल्कि अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को भी सहेज रहे हैं।
— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
नक्सलवाद का अंत, खुशहाली की शुरुआत
बैठक में जनजातीय विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि चार दशकों की नक्सल समस्या अब खात्मे की ओर है। उन्होंने बताया कि ‘पीएम जनमन’ योजना के तहत 32,000 आवासों की स्वीकृति और ‘धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना’ के जरिए 6,600 गांवों का विकास यह साबित करता है कि सरकार आदिवासियों के उत्थान के लिए कृतसंकल्पित है।
बैठक में दिग्गजों की मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण बैठक में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, वन मंत्री केदार कश्यप सहित बस्तर और सरगुजा विकास प्राधिकरणों के अध्यक्ष, कई विधायक और मुख्य सचिव विकास शील सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी विभागों को समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
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